बनारस के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी विशेष भृगुवंशी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत की। ये ऐसे पहले भारतीय है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल के प्रतिष्ठित NBL में खेलने का मौका मिला है। भारतीय बॉस्केटबाल टीम के पूर्व कप्तान ने प्रदेश में खिलाड़ियों को मिल रही सुविधा से निराश हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें...
विज्ञापन
2 of 6
Vishesh Bhriguvanshi
- फोटो : अमर उजाला
अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी विशेष भृगुवंशी प्रदेश सरकार की उपेक्षा से खासे आहत हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में खिलाड़ियों को न तो सुविधाएं मिल रही हैं और न सम्मान। खेल और खिलाड़ियों के प्रति सरकार का यह रवैया बेहद निराशाजनक है। उत्तर प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। यदि मुकम्मल सुविधाएं और प्रोत्साहन मिले तो पदकों की झड़ी लग जाएगी।
विज्ञापन
3 of 6
Vishesh Bhriguvanshi
- फोटो : अमर उजाला
रविवार को भुवनेश्वर नगर कॉलोनी, अर्दली बाजार स्थित अपने घर में अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने अपने विचार और भावी योजनाएं साझा कीं। एशियाई खेल और साउथ एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके विशेष का कहना है कि यूपी कॉलेज के बास्केटबॉल ग्राउंड से हर वर्ष एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकलता है। यदि पर्याप्त सुविधाएं मिलें तो यह संख्या कई गुना बढ़ जाएगी।
4 of 6
Vishesh Bhriguvanshi
- फोटो : twitter
अवार्ड के सवाल पर भारतीय बॉस्केटबाल टीम के पूर्व कप्तान का दर्द छलक पड़ा। देहरादून में ओएनजीसी में कार्यरत विशेष का कहना है प्रदेश में खिलाड़ियों को उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। बताया कि यूपी में जब अवार्ड के लिए आवेदन करते हैं तो कहा जाता है कि हम उत्तराखंड में नौकरी करते हैं जबकि उत्तराखंड में आवेदन नहीं कर सकते क्योंकि हम वहां के निवासी नहीं हैं। ऐसे में हमारे बस एक ही विकल्प है कि जब तक शरीर ताकत है केवल खेलते रहो।
विज्ञापन
5 of 6
Vishesh Bhriguvanshi
- फोटो : twitter
भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया कि अक्तूबर में होने वाली आस्ट्रेलियन लीग की तैयारी चल रही है। फिलहाल पूरा ध्यान 22 से 30 सितंबर तक चीन में होने वाले चैंपियंस कप पर है। विशेष ने कहा कि बॉस्केटबॉल खिलाड़ियों के लिए ऑल वेदर कोर्ट होना बेहद जरूरी है। इससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अभ्यास करने का मौका मिलेगा। युवा खिलाड़ियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि छोटी सोच रखने से रिजल्ट कभी बेहतर नहीं आएगा।
बेहतरीन खेल के बाद भी बेटे को सम्मान नहीं मिलने से पिता डॉ. पीके सिंह के चेहरे पर नाराजगी साफ नजर आ रही थी। उनका कहना था कि 2006 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी प्रदेश सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही। 34 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच और 54 से अधिक राष्ट्रीय कैंप में बेहतरीन रिकार्ड विशेष ने बनाए हैं। कहा कि अवार्ड के लिए खूब लामबंदी हो रही है।