समाज के लिए अभिशाप बने दहेज ने एक विवाहिता की जान ले ली थी। उसके मरने के छह साल बाद आज उसको न्याय मिला। उसके हत्यारोपी पति को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की आधी रकम मृतका की पुत्री को देने का आदेश दिया है। घटना यूपी के जौनपुर की है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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up police
जिले के सिकरारा थाने के बथुआवर निवासी समरजीत ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। उसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में कहा था कि उनकी बहन सुषमा देवी की शादी 10 मई 2002 को सरौली निवासी मनोज कुमार के साथ हुई थी। उसे दो बच्चियां भी हुईं।
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fire
- फोटो : fire
पति दहेज में बाइक की मांग को लेकर सुषमा को प्रताड़ित करता था। 26 सितंबर 2012 की रात शराब पीकर आया। पत्नी से झगड़ने लगा तथा उस पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी। ससुराल वाले अस्पताल ले गए।
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बिहारी कहने पर हत्या की
उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दिया कि पति ने उसे जलाया था। इलाज के दौरान 6 अक्टूबर 2012 को सुषमा की मृत्यु हो गई। पुलिस ने पति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया। एडीजीसी संजय श्रीवास्तव ने 10 गवाहों को परीक्षित कराया। मृतका के भाई, मां व उसकी पुत्री मधु ने भी घटना की पुष्टि की।
अभियुक्त ने तर्क दिया गया कि वह निर्दोष है। मृतका ने खुद को आग लगाकर जान दे दी थी। कोर्ट ने 23 पेज के फैसले में विधि व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए मामला विरल से विरलतम माना और अभियुक्त को मृत्युदंड की सजा सुनाई।