सौरभ चक्रवर्ती।
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काशी में हिंदी ने दी मुझे मेरी जमीन
एंकर सौरभ चक्रवर्ती कहते हैं कि हिंदी ने ही काशी में मुझे मेरी जमीन दी है। आज मैं जहां खड़ा हूं, वह हिंदी की ही देन है। बांग्ला भाषी होने के बावजूद हिंदी के बड़े-बड़े मंचों के संचालन की जिम्मेदारी मुझे दी गई और मैंने हिंदी के बूते ही सभी के विश्वास को बनाए रखा। हिंदी में लेख खासकर व्यक्ति और पर्व पर, मुझे आकर्षित करते हैं। वर्तमान परिस्थितियों से जोड़कर लिखना मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। शास्त्रीय संगीत, हिंदी कविताओं के पखवाड़े और साहित्य समारोहों में मुझे जो मंच मिला, वह हिंदी की बदौलत ही मिला। दरअसल, आपकी रुचि उस तरफ ही बढ़ती है, जहां आपको काम मिलता है। रेडियो में भी काम मिला तो हिंदी की ही बदौलत।