गाजीपुर में महाहर धाम के पास बिजली के तार की चपेट में आने से जलती बस में सवार लोग आग लगने के बाद बचाने के लिए चिल्लाते रह गए। बस जलती रही। 30 फीट ऊपर तक लपट से आसपास धुआं फैल गया। चार लोग पूरी तरह से जल गए। शवों की पहचान तक करना मुश्किल था।
ग्रामीणों ने साहस का परिचय दिया और बगल में नहर से पानी लेकर आग बुझाने के लिए आगे आए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटना के बाद बचाओ-बचाओ की चीख-पुकार ही सुनाई दे रही थी। मौके पर पहुंचे लोगों ने सड़क से सटी नहर से पानी लेकर बस में लगी आग पर काबू पाने करने की कोशिश करते रहे। हालांकि पूरी तरह से जल चुकी बस भयानकता को बयां कर रही थी।
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- फोटो : अमर उजाला
बस के अंदर से पड़े शव जब बाहर निकाले गए तो लोग सहम उठे, क्योंकि पहचाना करना मुश्किल था। शाम साढ़े चार बजे एसपी ग्रामीण बलवंत चौधरी बस में चढ़े और एक-एक सीट को गिनते हुए खंगालने की कोशिश में लगे रहे। वहीं, इसके बाद शाम पांच बजे बस को क्रेन बुलाकर हटाया गया।
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हादसे में उर्मिला (30) पत्नी फूलचन्द निवासी खिरिया जनपद मऊ, निर्मला (37) पत्नी रविन्द्र निवासी खिरिया मऊ, मुरारी (55) पत्नी दुर्गविजय निवासी रानीपुर (पिरुआ) मऊ, जगरनाथ (40) पुत्र रामाश्रय यादव (ड्राइवर) निवासी अकबरपुर रानीपुर मऊ, कालिन्दी (44) पत्नी अच्छे लाल निवासी खिरिया मऊ की मौत हो गई।
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परिजनों को तलाशती रहीं निगाहें
मेरी तीन माह की पुत्री तान्या कहां है, जिसको गोद में लेकर वह बस से कूदी थी। यह वाक्य उस मां के हैं, जो अस्पताल के वार्ड में भर्ती हादसे में झुलसे अंश और आर्यन का उपचार होते देख रही थी। इधर, मर्चरी हाउस में मां की शिनाख्त करने पहुंचा पुत्र फ्रीजर के बॉक्स तक पहुंचते ही बिलख उठा। परिजनों की निगाहें जहां अपनों को तलाशती रही, वहीं वार्ड से लेकर मर्चरी हाउस तक अफरा-तफरी रही। इधर, जिला और पुलिस के साथ मेडिकल कॉलेज प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। झुलसे मरीजों के उपचार के लिए पूरी ताकत झोंक दी।
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मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख और झुलसे लोगों को 50-50 हजार की सहायता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजीपुर हादसे का संज्ञान लिया। उन्होंने शोक संवेदना जताई और आग से झुलसे लोगों का तत्काल इलाज कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है। घायलों को 50-50 हजार रुपये मिलेंगे। इस बीच कैबिनेट मंत्री एके सिंह, अनिल राजभर, मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा, डीआईजी ओम प्रकाश सिंह भी जिला अस्पताल पहुंचे और झुलसे लोगों का हालचाल पूछा।
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नाराजगी में पथराव
डायल 112 के माध्यम से पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन पुलिस देरी से आई। इससे नाराज लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। हंगामा और नारेबाजी भी की है। बाद में जिलाधिकारी आर्यका अखौरी और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह फायर बिग्रेड की दो गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर नाराजगी दूर की है।
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दो दिन में जांच रिपोर्ट देंगे सीडीओ और एसपी सिटी
बस में आग लगने की घटना को लेकर शासन तक गंभीर है। जिलाधिकारी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय तक बताया है। साथ ही सीडीओ और एसपी सिटी की अगुवाई में जांच टीम गठित कर दो दिन के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है।
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जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने बताया कि बस में 40 से 45 व्यक्ति थे। बस मरदह में स्थित महाहर धाम से 100 मीटर पहले मेन रोड से उतर कर नहर की पटरी पर जा रही थी। लगभग 150 मीटर जाने के बाद 11000 वोल्ट की विद्युत तार से टकरा जाने के कारण लगभग दो बजे बस में आग लग गई। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी व क्षेत्राधिकारी कासिमाबाद गाजीपुर तथा स्थानीय थाना की फोर्स मौके पर पहुॅचकर फायर टेण्डर व स्थानीय लोगों की सहायता से आग पर काबू पाया गया।
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गंभीर रूप से घायल कुल 10 व्यक्तियों को सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र, मरदह में इलाज के लिए भेजा गया। जहां से प्राथमिक उपचार करने के बाद कुल 04 व्यक्तियों को उनकी इच्छानुसार जिला चिकित्सालय मऊ रेफर किया गया। 6 व्यक्तियों जिसमें 04 गम्भीर एवं 02 सामान्य रूपसे घायल व्यक्तियों को जिला चिकित्सालय, गाजीपुर में रेफर किया गया। घटना में मृत सभी 05 व्यक्तियों के परिजनों को विद्युत विभाग की ओर से रूपया 5-5 लाख की आर्थिक सहायता धनराशि प्रदान की जाएगी।
उन्होंने बताया कि घटना के कारणों की जांच कराई जाएगी। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार वैश्य व अपर पुलिस अधीक्षक नगर ज्ञानेंद्र की अगुवाई में संयुक्त जांच कमेटी गठित कर दी गई है,जो घटना के सभी पहलुओं पर जांच करके रिपोर्ट दो दिन के अंदर प्रस्तुत करेगी। जांच में दोषी पाए जाने पर सम्बन्धित अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जायेगी। घटना से संबंधित सभी तथ्यों को मुख्यमंत्री कार्यालय, उत्तर प्रदेश शासन व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन को अवगत करा दिया गया है।