यूपी के आजमगढ़ में एक गांव के एक घर में खुशियों के गीत गाए जा रहे थे। वहीं लोगों को भोज देने के लिए खाना बन रहा था। लोगों के चेहरे पर मुस्कान थी लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। जिस घर में कुछ देर पहले तक हंसी से रौनक थी अब वहीं मातमी सन्नाटा पसरा था। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
जिले के रानी की सराय थाना क्षेत्र के कोटवा चक बंगाली गांव में सोमवार को दिन में भंडारे के लिए बन रहे भोजन के दौरान सिलेंडर रिसने से पास रखे भूसे में आग लग गई। आग का धुआं टीन शेड वाले कमरे में भर गया। जिससे दम घुटने से दो मासूम समेत छह लोगों की मौत हो गई। दरअसल, कोटवा चक बंगाली गांव की निवासी 80 वर्षीया रामताजी देवी पत्नी स्व. बलेश्वर ने गुरुमंत्र लिया था। इसी उपलक्ष्य में घर पर भंडारे का आयोजन किया था। जिसमें काफी लोग आए हुए थे।
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धुएं में दम घुटने से दो मासूम समेत छह की मौत से रानी की सराय थाना क्षेत्र के कोटिला चक बंगाली गांव मातमी सन्नाटा पसर गया। सभी आंख के सामने हुई घटना को लेकर गमगीन नजर आये। गांव के पुरूष सदस्य तो अस्पताल चले आये थे और महिलाएं कार्यक्रम स्थल पर ही जुट कर रो-बिलख रही थी।
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गांव की बुजुर्ग महिलाओं में शामिल 80 वर्षीया रामताजी देवी पत्नी स्व. बलेश्वर के गुरुमंत्र लेने के बाद आयोजित भंडारे को लेकर पूरे गांव में सोमवार की सुबह से ही जश्न जैसा माहौल था। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गांव की महिलाएं रामताजी देवी के घर पर जुटी हुई थी। वहीं बाहर से भी कई नात रिश्तेदार भी आये थे। जिस कमरे में आग से जान बचाने के लिए महिलाएं और बच्चियां घ़ुसी थी वहीं कमरा उनके लिए काल का घर साबित हुआ।
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बेहोश हुई दो मासूम, एक युवती और चार महिलाओं को कमरे से निकाल कर अस्पताल भेजने के बाद तो जैसे पूरा गांव ही उजड़ गया था। सभी एंबुलेंस के पीछे-पीछे ही अस्पताल के लिए रवाना हो गये। अस्पताल पर दो मासूमों समेत छह के मौत की पूष्टि होने की खबर जब गांव में पहुंची तो पूरा गांव ही जैसे बिलख पड़ा।
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घटना को लेकर गांव की महिलाएं पूरी तरह से हतप्रभ नजर आयी। पूछने पर पर सिर्फ वे यह ही कर रही थी कि काश आग से बचने के लिए महिलाएं कमरे में न गई होती। महिलाओं का कहना था कि सब कुछ इतना अचानक हुआ कि किसी की नजर ही कमरे में धुंआ भरने की ओर नहीं गया। भूसा में आग लगने पर लोग पहले आग बुझाने में जुट गये थे। कमरे में महिलाओं और बच्चों के होने का अंदेशा यदि समय रहते हो गया होता तो शायद इतनी जान नहीं गई होती।
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इस हृदय विदारक घटना में जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के जमीन नरहन खास गांव निवासी राजेंद्र ने अपनी पत्नी और मासूम बच्ची को खो दिया। जिला अस्पताल पर दोनों के मृत घोषित होते ही उसका रो-रो कर बुरा हाल हो गया था। वह उस पल को कोस रहा था जब उसने अपनी पत्नी को मासूम बच्ची के साथ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भेजा था।
हादसे में मां रामताजी देवी और पत्नी कविता की मौत ने तो महेंद्र को एक दम तोड़ ही दिया था। अस्पताल पर वह रो-रो कर बेहोश हो जा रहा था। वहीं उसकी बेटी पुजियंका अस्पताल में जीवन मौत से जूझ रही थी। कभी वह भाग कर बेटी को देखने जाता तो कभी मृत मां और पत्नी को देख कर बिलख उठता था। लोग उसे ढाढस बंउधा रहे थे लेकिन मां और पत्नी को खोने और बेटी के गंभीर हालत ने उसे बेहाल कर दिया था।