24 मई को पड़ने वाले गंगा दशहरा पर इस बार अद्भुत संयोग बन रहा है। गंगा दशहरा पर गर करण, वृषस्थ सूर्य, कन्या का चंद्र होने के कारण बेहद खास होगा जो महाफलदायी है। इस बार योग विशेष का बाहुल्य होने से इस दिन स्नान, दान, जप, तप, व्रत और उपवास आदि करने का बहुत महत्व है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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ganga snan
ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता। हरते दश पापानि तस्माद् दशहरा स्मृता।। गंगा दशहरा पर विशेष योग में स्नान करने वालों के दस प्रकार (तीन प्रकार के कायिक, चार प्रकार के वाचिक और तीन प्रकार के मानसिक) के पाप दूर होते हैं।
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इसके अलावा गंगा दशहरा ज्येष्ठ अधिकमास में होने से पूर्वोक्त कृत्य शुद्ध की अपेक्षा मलमास में करने से अधिक फल प्राप्त होता है। काशी के ज्योतिषाचार्य एवं शोध छात्र पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि गंगा दशहरा के दिन दशाश्वमेध घाट पर दस प्रकार के स्नान करके शिवलिंग का दस संख्या में गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और फल आदि से पूजन करके रात्रि जागरण करने वाले को अनंत फल प्राप्त होता है।
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कछला घाट पर गंगा में डूबे चार श्रद्धालु, तीन की मौत
- फोटो : अमर उजाला
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में स्वर्ग से गंगा का आगमन हुआ था। श्रीमद्भागवत महापुराण में गंगा की महिमा बताते हुए शुकदेव जी परीक्षित से कहते हैं कि जब गंगाजल से शरीर की राख का स्पर्श हो जाने से सगर के पुत्रों को स्वर्ग की प्राप्ति हो गई, तब जो लोग श्रद्धा के साथ नियम लेकर श्रीगंगाजी का सेवन करते हैं उनके संबंध में तो कहना ही क्या है।
गंगा दशहरा के दिन गंगा या समीप के किसी भी जलाशय या घर के शुद्ध जल से स्नान करके सुवर्णादि के पात्र में त्रिनेत्र, चतुर्भुज, सर्वावयवभूषित, रत्नकुम्भधारिणी, श्वेत वस्त्रादि से सुशोभित तथा वर और अभयमुद्रा से युक्त श्रीगंगा जी की प्रशान्त मूर्ति अंकित करें अथवा किसी साक्षात् मूर्ति के समीप बैठ जाय। फिर ऊं नम: शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम: से आवाहनादि षोडषोपचार पूजन करें।