भारतीय संस्कृति में हिंदू धर्म के अनुसार किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए सबसे पहले गजानन यानी गणेश जी को पूजा जाता है। मान्यता यह है कि जहां शुभ होता है लाभ भी वही आता है। श्रीगणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों के सभी दुखों को हर लेते हैं। गणेश का पसंदीदा अंक चार है इसीलिए हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी कहा जाता है आगे की स्लाइड्स में देखें...
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ganesh utsav
- फोटो : ganesh utsav
मान्यता है कि विनायकी गणेश चतुर्थी का व्रत करने से सिद्धि की प्राप्ति होती है। साल के पहले महीने में यह चतुर्थी 10 जनवरी को पड़ रही है। चतुर्थी तिथि का योग बुधवार, नौ जनवरी को दोपहर 2:39 से अगले दिन गुरुवार, 10 जनवरी को शाम 5:22 तक रहेगा। इस तरह से गणेश चतुर्थी का व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा।
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गणेश
विनायकी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत रखने से विद्यार्थियों को विशेष लाभ होगा वहीं यह व्रत महिला-पुरुष दोनों के फलदाई है। गणेश चतुर्थी का व्रत रखते हुए गजानन की पूजा विधि विधान से करने से इसका लाभ आपके जीवन पर होगा।
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ganesh
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ज्योतिषविद् विमल जैन के अनुसार गणेश चतुर्थी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह उठकर अपने सभी नित्य कर्म कर लेने चाहिए। इसके बाद अपने इष्ट देवी देवता की पूजा करके श्रीगणेश चतुर्थी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। फिर गणेश का श्रृंगार करके उन्हें दूर्वा की माला, लड्डू, मौसमी फल आदि चढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही गणेशजी की पंचोपचार, दशोपचार या षोडशोपचार से विधि विधान से पूजा करनी चाहिए।
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Ganesh Chaturthi
गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश स्तुति, संकटनाशन श्री गणेश स्तोत्र, श्री गणेश अथर्व शीर्ष, श्री गणेश सहस्त्रनाम, गणेश चालीसा और गणेश जी से संबंधित अन्य स्त्रोत का पाठ जरूर करना चाहिए साथ ही गणेश से संबंधित मंत्र जैसे 'ॐ गण गणपतये नमः' का जाप करना चाहिए।
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गणेश के मंत्रों का जाप करने से विद्यार्थियों में एकाग्रता बनी रहती है इसलिए खासकर छात्रों को श्री गणेश की पूजा अवश्य करनी चाहिए। वहीं व्रत रखने वाले महिला-पुरुष को मनोरथ की पूर्ति के साथ ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत करने से जीवन में सुख-सौभाग्य और लाभ की वृद्धि होती है।
इस साल गणेश चतुर्थी के व्रतों की तिथि 10 जनवरी, 8 फरवरी, 10 मार्च, 9 अप्रैल, 8 मई, 7 जून , 6 जुलाई, 4 अगस्त, 2 सितंबर, 2 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 11 नवंबर, 30 नवंबर, 30 दिसंबर हैं। गणेश चतुर्थी के साल के हर माह के व्रत रखने से भक्तों के पापों का शमन होगा और शुभ ही शुभ होगा।