वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:, निर्विघ्नं कुरु में देव सर्व कार्येषु सर्वदा। अर्थात घुमावदार सूंड वाले, विशालकाय शरीर, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करने की कृपा करें॥
शिव की नगरी काशी में उनके पुत्र और प्रथम पूज्य गणेश के उत्सव की रंगत भक्तों पर नजर आने लगी है। मराठी समाज के अलावा भी घर-घर में भगवान गणेश को विराजमान कराया गया है। तो आइए हम आपको दर्शन कराते हैं काशी के प्रमुख पंच विनायक से...।
बाबा विश्वनाथ से पहले करते हैं ढुंढिराज को प्रणाम
काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश से पहले ढुंढिराज गणेश का मंदिर विराजमान है। बाबा के दर्शन करने आने वाले भक्त सबसे पहले ढुंढिराज को प्रणाम करके आगे बढ़ते हैं। मान्यता है कि भगवान गणेश इस स्वरूप में काशी के कष्टों को भी हरते हैं। जो भक्त निरंतर इनका नाम जपता है, अष्ट सिद्धियां उस व्यक्ति का नाम जपती हैं। उस व्यक्ति को जीवन में समस्त ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।