मिर्जापुर में लालगंज के दुबार निवासी डा. गुलाब मिश्रा के बेटे संजय मिश्रा की एक वर्ष पूर्व ही रावटर्सगंज के बरकरा निवासी हरिगोविंद चौबे की बेटी प्रीती से शादी हुई थी। इन दिनों वह मायके में गई थी। जिसको लेने गुलाब अपने तीन पोते-पोतियों के साथ जा रहे थे। लेकिन उनको क्या पता था ईश्वर को कुछ और ही मंजूर है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
गुलाब जब शनिवार को अपनी छोटी बहू को मायके से लेने के लिए निकल तो अभिरल, श्रृष्टी और यशस्वी ने चाची प्रीती के घर जाने के लिए जिद पकड़ ली। उनकी जिंद के आगे परिवार के लोग भी हार गए और उनको ले जाने के लिए तैयार हो गए।
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वहीं सोनभद्र-मिर्जापुर मार्ग पर लूसा गांव के पास शनिवार की शाम चार बजे हुई सड़क दुर्घटना में परिवार के मुखिया समेत चार लोगों की मौत की खबर लगते ही परिवार में कोहराम मच गया। डा. गुलाब को राजगढ़ के लूसा गांव में होने वाले इतने बड़े हादसे का अंदेशा नहीं था। उन्होंने सोचा नहीं था कि एक ऐसा पल आएगा जिसमें उनका आधा परिवार समाप्त हो जाएगा।
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पेड़ से टकराई कार
- फोटो : अमर उजाला
इससे पहले परिवार के लोगों ने गुलाब को हंसी खुशी बहू को लाने के लिए भेजा था। उनकी पत्नी और बड़ी बहू चंचला, बेटा अरूण और डा. संजय भी काफी खुश थे। घर के बच्चे अभिरल, श्रृष्टी और दो वर्षीय मासूम यशस्वी भी चाची के घर जाने की बात सुनकर काफी उत्साहित थी। घर से दोपहर करीब दो बजे इंडिगो कार में सवार होकर निकले।
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लेकिन उसे क्या पता था कि जिस बहू के घर वह जा रहे हैं उसके घर पहुंचने से पहले ही बीच रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है। शाम चार बजे जैसे ही उनकी गाड़ी राजगढ़ के लूसा गांव के पास पहुंची कि चालक को अचानक झपकी आ गई और गाड़ी का संतुलन बिगड़ गया। जिससे गाड़ी अनियंत्रित होकर कई खंड में पलटते हुए पेड़ से जाकर टकरा गई और इस हादसे में गुलाब, उनका पोता अभिरल, पोती श्रृष्टी, यशस्वी और चालक अशोक की मौत हो गई।
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गुलाब समेत उनके परिवार में चार सदस्यों की मौत हो जाने के बाद अब उनके घर में उनका बड़ा बेटा अरूण, छोटा बेटा संजय, बहू चंचला, उनकी पत्नी बचे हुए है। बड़े बेटे का तीनों बच्चे काल की गाल में समा गए। गुलाब मिश्रा बीएमएस डाक्टर थे। इनकी लालगंज के दुबार बाजार में आराध्या के नाम से क्लीनिक है। छोटा बेटा संजय भी दांत का डाक्टर है।
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लालगंज के लोगों ने बताया कि गुलाब की दोनों मासूम पोतिया श्रृष्टी और यशस्वी काफी चंचल थी। उनकी चंचला के कारण पूरा परिवार खुश रहता था परिवार के लोगों ने कहा कि अगर इन लोगों ने जिंद नहीं की होती है शायद उनकी जान नहीं जाती।
तीनों बच्चों को जमीन पर लेटा देख किसी को यहीं नहीं हो रहा था कि वह अब इस दुनिया में नहीं है। उनको देखकर ऐसा लग रहा था कि वह सफर से थक जाने के कारण जमीन पर लेटकर सो गए हैं।