फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बनारस में इस बात पर भिड़ गए सपा के कद्दावर नेता और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य

Thu, 19 Apr 2018 02:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
1 of 8
विश्व धरोहर दिवस - फोटो : अमर उजाला
बनारस में एक बैठक के दौरान सपा के कद्दावर नेता और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य आपस में भिड़ गए। दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप इस कदर बढ़ गए कि दस मिनट तक हंगामे की स्थिति रही। आगे की स्लाइड्स में जाने पूरा मामला...

 
विज्ञापन

2 of 8
विश्व धरोहर दिवस - फोटो : अमर उजाला
विश्व धरोहर दिवस पर काशी की धरोहर बचाने के लिए बुधवार को पराड़कर स्मृति भवन में धरोहर बचाओ समिति की ओर से विद्वत बैठक आयोजित की गई थी। इसमें पहुंचे सपा एमएलसी शतरूद्र प्रकाश ने काशी विश्वनाथ मंदिर को धरोहर घोषित करने की बात कही। 

 
विज्ञापन

3 of 8
विश्व धरोहर दिवस - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि जगन्नाथ पुरी, कोणार्क मंदिर और कामाख्या देवी के मंदिर पहले से इस श्रेणी में शामिल किए जा चुके हैं। इसके लिए वह 10 साल से विधान परिषद में लड़ाई लड़ रहे हैं। बाबा दरबार के प्राचीन स्वरूप को बरकरार रखने के लिए सबको एकजुट होना होगा। इसके बगैर इसमें सफलता नहीं मिलेगी। 

 

4 of 8
विश्व धरोहर दिवस - फोटो : अमर उजाला
बैठक में मौजूद स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद यह सुनकर उखड़ गए। उन्होंने तेज आवाज में शतरूद्र प्रकाश के विश्वनाथ मंदिर को धरोहर कहे जाने का प्रतिकार किया। उन्होंने कहा कि मंदिर को धरोहर कहना गलत है। धरोहर वो है जिसमें जीवन नहीं है जबकि विश्वनाथ मंदिर पूरी तरह से जीवंत है। 

 
विज्ञापन

5 of 8
शतरूद्र प्रकाश
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में हो रही तोड़फोड़ पर नाराजगी जताई। जिस तरह से हजारों साल से पूजित प्रतिमाओं को तोड़ा जा रहा है, वह उनकी रक्षा के संकल्प से कार्यक्रम में आए थे, धरोहर दिवस के कार्यक्रम में नहीं। इसके बाद इस मुद्दे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और शतरूद्र प्रकाश के बीच करीब दस मिनट तक तीखी बहस हुई। 

 
विज्ञापन

6 of 8
विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद - फोटो : अमर उजाला
शतरूद्र प्रकाश के साथ आए सपा के महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल व अन्य नेता उनके पक्ष में आ गए। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। गर्मागर्म माहौल में पहले शतरूद्र प्रकाश बैठक छोड़ बाहर निकल गए। बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी अपने अनुयाइयों संग वहां से चले गए। 

 
विज्ञापन

7 of 8
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि यदि कोई मंदिर धरोहर में शामिल हो जाता है तो वहां पूजा-पाठ पूरी तरह से प्रतिबंधित हो जाते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर को धरोहर घोषित करने की मांग शामिल करने वाले यहां पूजा-पाठ पर पाबंदी लगाने की साजिश में संलिप्त लग रहे हैं। 

 
विज्ञापन

8 of 8
एमएलसी शतरूद्र प्रकाश बोले, छेड़खानी के आरोपी नहीं पकड़े गए तो आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
शतरूद्र प्रकाश का कहना है कि भारत में धरोहरों के संरक्षण के लिए कानून है। धरोहर घोषित करने से पूजा पद्धति पर कोई पाबंदी नहीं लगती है। इसके प्रबंधन में शासन-प्रशासन का हस्तक्षेप नहीं होता है। ऐसा होने पर मंदिर के पौराणिक स्वरूप को यथावत रखा जाता है।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें