अद्भुत, अकल्पनीय और भव्य... दीप मालिकाओं की सुनहरी आभा से दमकते घाटों का आकर्षण आंखों के रास्ते हृदय में उतरता चला गया। दीपों की लड़ियों की ज्योतिगंगा उत्तरवाहिनी के समानांतर दोनों छोर पर प्रवाहित हो रही थी। शंखनाद, घंटा-घड़ियाल, कपूर और लोबान की सुवास के साथ ही 84 घाटों के दोनों छोर 10 लाख से अधिक दीपों से जगमग हो उठे। नमो घाट से रविदास घाट तक अनंत दीप आसमान के सितारों को भी अपनी चमक से मात दे रहे थे। ऐसा दृश्य जो न कभी देखा, न सुना और न किसी ने सुनाया।
सोमवार की शाम को पंचगंगा घाट पर जैसे ही हजारा दीप प्रज्ज्वलित हुआ, गंगा के किनारे साढ़े सात किलोमीटर का तट भी एक-एक करके जगमग हो उठा। अर्द्धचंद्राकार घाटों पर चंद्रहार की तरह दीपक झिलमिलाने लगे। पर्यटकों ने इस अलौकिक नजारे को देखा तो बस देखते ही रह गए।गंगा की लहरों पर सतरंगी इंद्रधनुष आकाश से उतर आया। घाटों पर देवलोक का साक्षात अलौकिक दृश्य मन मोह रहा था।