बनारस के तुलसीघाट पर ध्रुपद तीर्थ में दूसरे दिन ध्रुपद मेले में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। गायन, वादन से सजी सुरों की संध्या में देर रात तक श्रोताओं ने लय, ताल और साज का आनंद उठाया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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Dhrupad Mela
- फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम का आगाज युवा कलाकार मिलन उपाध्याय के गायन से हुआ। मिलन ने गायन का आरंभ राग बागेश्री में आलाप के साथ चौताल में निबद्ध रचना तूम हो करुणानिधान...से किया। समापन उन्होंने जय जय महादेव राग अड़ाना में सूल ताल में निबद्ध रचना से किया। पखावज पर उनके साथ महिमा उपाध्याय और हारमोनियम पर पं. जमुना बल्लभ गुजराती ने संगत की।
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मेले की दूसरी प्रस्तुति पं रविशंकर उपाध्याय के स्वतंत्र पखावज वादन रही। उन्होंने गणपति वंदना श्रवण सुंदर नाम गणपति...से आरंभ किया। समापन उन्होंने चक्करदार परन से किया। वादन में सहयोग उनकी पुत्री महिमा उपाध्याय एवं शिष्य अमित कुमार ने किया।
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तृतीय प्रस्तुति में काशी के प्रो. ऋत्विक सान्याल का ध्रुपद गायन और तेश्या कन्हाईकों, अंकित पारिख के पखावज और तानपुरे पर आशीष जायसवाल संगत की। प्रो. ऋत्विक सान्याल ने गायन का आरंभ राग भिन्नेश्वरी में आलापचारी क़े साथ चौताल में निबद्ध ध्रुपद रचना जोगी शिव शंकर...से किया। गायन का समापन सूलताल में निबद्ध रचना ज्ञान अनंत रूप से गायन का समापन किया।
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ध्रुपदतीर्थ पर सजाई गई कला दीर्घा सभी के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसमें बनाई गई शिवबारात देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। शिव और काशी पर आधारित कला प्रदर्शनी में केंद्रीय विद्यालय अवंतीपुरम से पूजा शाह और सागर से दीपिका शर्मा खास इस ध्रुपद मेले में अपनी पेंटिंग लगाने के लिए आई हैं।
इसके साथ ही ध्रुपद मेले में सनबीम सामनेघाट के कला अध्यापक अनिल शर्मा के नेतृत्व में पंकज वर्मा, आशीष गुप्ता, अनामिका सिंह ने ध्रुपद मेले के संस्थापकों काशिराज स्व. विभूतिनारायण सिंह, महंत संकटमोचन स्व. वीरभद्र मिश्र, स्व. पं. अमरनाथ मिश्र व स्व. पं. लालमणि मिश्र के कटआउट बनाए गए हैं। कला दीर्घा में शिवबारात लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।