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चंद्रग्रहण के चलते शाम चार बजे के बाद बंद हो जाएंगे मंदिरों के पट, भूल कर भी ना करें ये 6 काम

Tue, 16 Jul 2019 01:01 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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गुरुपूर्णिमा पर खंडग्रास चंद्रग्रहण लग रहा है। इसके चलते मंगलवार को काशी विश्वनाथ मंदिर को छोड़कर सभी देवताओं के मंदिर शाम को 4.30 बजे से ही बंद हो जाएंगे। वहीं बुधवार सुबह की मंगला आरती भी सूतक के चलते एक घंटे देरी से होगी। इसी तरह गंगा आरती भी तीन बजे ही होगी। इस खंडग्रास चंद्रग्रहण में कई कार्यों को करने के लिए मना किया जाता है। जानिए चंद्रग्रहण के चलते आप क्या कर सकते हैं और क्या नहीं, पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
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संकट मोचन मंदिर (फाइल फोटो)
आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार 16 और 17 जुलाई 2019 को लगने वाला चंद्रग्रहण भारत में खंडग्रास चंद्रग्रहण के रूप में दिखेगा, जो 2 घंटा 59 मिनट का होगा। भारतीय मानक समयानुसार ग्रहण का प्रारंभ रात्रि 1 बजकर 31 मिनट पर जबकि ग्रहण का मध्य रात्रि 3 बजकर 1 मिनट पर और मोक्ष रात्रि 4 बजकर 30 मिनट पर होगा। ग्रहण का स्पर्श, मध्य, मोक्ष पूरे भारत में देखा जा सकेगा। चंद्र ग्रहण में ग्रहण से 9 घंटे पहले ही सूतक होता है, जो दिन में 4.30 बजे से ग्रहण समाप्त होने तक रहेगा। इसके चलते संकट मोचन मंदिर, बड़ा गणेश, दुर्गाकुंड सहित अन्य मंदिर चार बजकर 30 मिनट पर ही बंद हो जाएंगे। इसके लिए मंदिरों के बाहर सूचना लगा दी गई है। 
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बाबा विश्वनाथ मंदिर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विश्वनाथ मंदिर में दो घंटे पहले होगी मंगला आरती :
काशी विश्वनाथ मंदिर की परंपरा के अनुसार ग्रहण के सूतक काल में मंदिर की व्यवस्थाएं यथावत रहेंगी। ऐसे में केवल भगवान को भोग फलाहार का लगेगा। इसलिए ग्रहण के सूतक काल में सप्तऋषि आरती, भोग श्रृंगार आरती और शयन आरती अपने निर्धारित समय पर ही होंगी। जबकि बुधवार की सुबह मंगला आरती के समय ग्रहण का दोष रहेगा। इसलिए मंगला आरती दो घंटे विलंब से 4.45 बजे होगी।

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गंगा आरती (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
तीन बजे होगी गंगा आरती :
दशाश्वमेध घाट और शीतला घाट पर होने वाली गंगा आरती निर्धारित समय से करीब तीन घंटा पहले होगी। गंगा सेवा निधि और गंगोत्री सेवा निधि के अनुसार दोपहर तीन बजे से ही मां गंगा की आरती की जाएगी। इसके लिए भी श्रद्धालुओं को जानकारी दी जाएगी।
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ग्रहण काल में ये कार्य हैं वर्जित :
  1. ग्रहण की अवधि में तेल लगाना, भोजन करना, जल पीना, सोना, केश संवारना, मंजन करना, वस्त्र निचोड़ना, ताला खोलना मना है।
  2. चंद्रग्रहण में तीन प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए, बूढ़े, बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व खा सकते हैं ।
  3. ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ना चाहिए।
  4. स्कंद पुराण के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट हो जाता है।
  5. ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
  6. गर्भवती स्त्री को सूर्य, चन्द्र ग्रहण नहीं देखना चाहिए, गर्भवती स्त्री को कुछ भी कैंची, चाकू आदि से काटने को मना किया जाता है।
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ये कर सकते हैं :
  1. ग्रहण लगने से पूर्व स्नान करके भगवान का पूजन, यज्ञ, जप करना चाहिए।
  2. चंद्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है।
  3. ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवान जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।
  4. ग्रहण समाप्त हो जाने पर स्नान करके ब्राह्मण को दान करने का विधान है।
  5. ग्रहण के बाद पुराना पानी, अन्न नष्ट कर नया भोजन पकाया जाता है और ताजा भरकर पीना चाहिए।
  6. ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चंद्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिंब देखकर भोजन करना चाहिए।
  7. ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र को धो देना चाहिए।
  8. ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरत मंदों को वस्तु दान देने से पुण्य प्राप्त होता है।
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