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चैत्र नवरात्र कल से शुरूः कलश स्थापना का ये है शुभ मुहूर्त, व्रत के दौरान ना करें यह काम

Sat, 17 Mar 2018 02:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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navratri - फोटो : navratri

मां आदि शक्ति की आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्र 18 मार्च से शुरू हो रहा है। शिव की नगरी काशी शक्ति की उपासना में डूबी रहेगी। 25 मार्च को नवमी तिथि का क्षय होने के कारण नवरात्र इस बार आठ दिन का ही होगा।  चैत्र नवरात्र में आदि शक्ति जगदंबा के साथ नौ गौरी के दर्शन और पूजन का विधान है।  नवरात्रि के पहले दिन की जाती है कलश स्थापना।  आगे की स्लाइढ्स में जानिए... 

 
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navratri 2018 - फोटो : amar ujala
 चैती छठ 23 मार्च को मनाया जाएगा और नवमी पूजा के नाम से प्रचलित महानिशा पूजन 24 मार्च को होगा। महाअष्टमी का व्रत 25 मार्च को होगा। श्री काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री दीपक मालवीय ने बताया कि कलश स्थापना प्रतिपदा तिथि में प्रात: काल की जाएगी। इसके अलावा मध्याह्न में अभिजित मूहूर्त में 11:36 बजे से दिन में 12:24 बजे तक का मूहूर्त है। 

 
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navratri 2018 - फोटो : amar ujala
वैसे प्रतिपदा तिथि के उपरांत कलश स्थापना करने में कोई दोष नहीं है। 25 मार्च को नवमी तिथि का क्षय हो गया है। अत: अनुदया नवमी तिथि में नवमी का व्रत भी किया जाएगा। इसके साथ ही श्री राम नवमी का सनातन पर्व भी मनाया जाएगा। नवरात्र का हवन 25 मार्च को सुबह 7 बजकर तीन मिनट के बाद दिन-रात किसी भी समय किया जा सकता है। नवरात्र व्रत का पारण 26 मार्च सोमवार को प्रात: काल में किया जाएगा।
 

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navratri 2018 - फोटो : amar ujala

चैत्र नवरात्र के पहले दिन 18 मार्च को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 09 बजे से 12 बजे तक अति उत्तम है। विकल्प के रूप में संपूर्ण प्रतिपदा तिथि में ही कलश स्थापन किया जा सकता है। प्रतिपदा 18 मार्च को सूर्योदय 6 बजकर 2 मिनट से शुरू होगी। 

 
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25 मार्च को सुबह 07.03 बजे तक अष्टमी तिथि होगी, उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। 25 को नवमी तिथि में ही हवन-पूजन सुबह 07.03 बजे के बाद दिन-रात किसी भी समय किया जा सकता है। इसी दिन प्रभु श्रीराम की जयंती यानी रामनवमी भी मनाई जाएगी। नवरात्र का पारण दशमी तिथि 26 मार्च दिन सोमवार सुबह किया जाएगा।






 
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नवरात्रि में व्रत रखने वालों के लिए कुछ नियम होते हैं। नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखने वालों को दाढ़ी-मूंछ और बाल, नाखून नहीं कटवाने चाहिए। कलश स्थापना कर रहे हैं या अखंड ज्योति जला रहे हैं तो इन दिनों घर खाली छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहिए। इस दौरान खाने में प्याज, लहसुन और मांसाहार बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। क्योकि  इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। 

 
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18 मार्च से विरोधकृत नामक संवत्सर 2075 का आरंभ हो रहा है। भारतीय सनातनी धार्मिक व्यवस्था में विक्रमी संवत को ही सर्वप्रधान माना गया है। संवत्सर के राजा का पद सूर्य को प्राप्त है और मंत्री का पद शनि को प्राप्त है।

 
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