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बनारसः गंगा की मध्यधारा में सजी बुढ़वा मंगल की महफिल

Wed, 14 Mar 2018 02:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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Budhwa Mangal - फोटो : अमर उजाला
बनारस के अस्सी घाट पर मंगलवार की रात गंगा की मध्य धारा में बजड़े पर सजा काशी का अनुपम जलोत्सव ‘बुढ़वा मंगल’। होली, चैती और ठुमरी की सुमधुर प्रस्तुतियों और फूलों की होली के बीच ‘बुढ़वा मंगल’ की महफिल हर किसी के लिए यादगार बन गई। आगे की स्लाइड्स में देखें...

 
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Budhwa Mangal - फोटो : अमर उजाला
इस अद्भुत नजारे को हर किसी ने अपनी आंखों में रचाया-बसाया। मस्ती और उमंग के रंग-तरंग हर तरफ छाए नजर आए। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र और संस्कृति विभाग के तत्वावधान में इस अनूठे पारंपरिक जलोत्सव का शुभारंभ मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, विधायक रविंद्र जायसवाल के अलावा रत्नेश वर्मा और आरके चौधरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। 

 
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Budhwa Mangal - फोटो : अमर उजाला
बजड़े पर सजी महफिल में सबसे पहले शहनाई की मिठास घोली कलाकार योगेश कुमार शंकर ने। फिर किशन रामदोहकर का वादन हुआ और फिर एक से एक प्रस्तुतियों के साथ गंगा की लहरों पर स्वरलहरियों का जादू छाता चला गया। किशन रामदोहकर ने राग मारुबिहाग में निबद्ध रचना सुनाई। 

 

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Budhwa Mangal - फोटो : अमर उजाला
डॉ. राजेश्वर आचार्य ने बनारसी ठुमरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ तबले पर पं. नंदकिशोर मिश्र और वायलिन पर पं. सुखदेव मिश्र और हारमोनियम पर नागेंद्र शर्मा ने संगत की। गायन में सहयोग रहा उनकी शिष्या शिवानी आचार्य और शिष्य डॉ. प्रीतेश आचार्य का। उन्होंने राग जोग में मध्य तीनताल की रचना सुनाई, बोल थे- जय जय शिव शंकर भोले। इसके बाद द्रुत तीनताल में निबद्ध रचना सुनाई। बोल थे- जय जय शिव शंकर भोले। गायन का समापन स्वरचित चैती से किया। 

 
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Budhwa Mangal - फोटो : अमर उजाला
फिर सुरों की रसधार बहाई पद्मविभूषण गिरिजा देवी जी की शिष्या डॉ. रीता देव ने। उन्होंने पिचकारी न मारो नंदलाल रे... गाकर शुरुआत की। सुरों का जादू छाया तो होली की अलमस्ती के साथ महफिल के रंग और चटख हो गए। उनके साथ तबले पर पं. कुबेर नाथ मिश्र और हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्र, शहनाई पर अंसार अली, तानपुरे पर शुचि उपाध्याय ने संगत की। 

 
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Budhwa Mangal - फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ पारंपरिक परिधान का पुरस्कार आयोजन समिति की ओर से आध्यात्मिक गुरु स्वामी ओमा द अक को दिया गया। स्त्रियों में श्रेष्ठ परिधान का पुरस्कार अनामिका को मिला।
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