छठे बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव के अंतिम दिन रविवार को 30 देशों के 235 डेलीगेट्स दो विशेष विमानों से काशी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भारतीय परंपरा और अध्यात्म को करीब से देखा। जगह-जगह हुए पांरपरिक स्वागत से अभिभूत अतिथि सारनाथ में दर्शन-पूजन कर निहाल हो गए। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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- फोटो : amar ujala
राजगीर और औरंगाबाद से लौटे सैलानियों ने स्वीकार किया कि काशी जैसा स्वागत कहीं नहीं हुआ। शाम को विदेशी मेहमान दिल्ली लौट गए। वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर मुख्य टर्मिनल भवन में शहनाई की धुनों और पुष्प वर्षा के बीच गुलाब का फूल और खाता भेंट कर मेहमानों का स्वागत किया गया।
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जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ ही एयरपोर्ट निदेशक अनिल कुमार राय, सीआईएसएफ के डिप्टी कमांडेंट सुब्रत झा आदि इस मौके पर मौजूद रहे। इसके बाद 203 विदेशियों सहित 235 मेहमानों को आठ बसों और 15 छोटी गाड़ियों के जरिए सड़क मार्ग से कैंटोनमेंट स्थित होटल लाया गया।
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यहां प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने सभी डेलीगेट्स का स्वागत किया और उन्हें काष्ठ निर्मित भगवान बुद्ध की मूर्ति स्मृति चिह्न के रूप में प्रदान की। प्रतिनिधियों का बताया, वाराणसी की धरती विश्व की सबसे पुरानी संस्कृति की पुस्तक है।
दोपहर के भोजन के बाद उन्हें भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ ले जाया गया। प्रतिनिधियों ने मूल गंध कुटी विहार, धमेक स्तूप देखा और दर्शन-पूजन किया। ये लोग विभिन्न देशों के बने विहारों के अधिपति से भी मिले। कुछ मेहमानों ने संग्रहालय भी देखा।