यूपी के आजमगढ़ निवासी एक कलाकार ने अपने हुनर से लोगों को कायल किया हुआ है। उनके हाथों में ऐसी जादू है जिसे लोग देखकर हतप्रभ हो जाते हैं। मिट्टी के बर्तनों को सूक्ष्म रूप देने में इन्हें महारत हासिल है। इनकी कलाकृतियों का प्रदर्शन विदेशों में भी हुई है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें....
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- फोटो : अमर उजाला
एक इंच व्यास वाले एक रुपये के सिक्के पर कितने बर्तन रखे जा सकते हैं? इस तरह का सवाल पूछने पर कोई भी आपकी खिल्ली उड़ा सकता है। मगर शिवरतन प्रजापति इसके जवाब में गिलट के इस अदने से सिक्के पर 30 बर्तन सजा देते हैं। माचिस की तीली पर 10 बर्तन धड़ाधड़ रख देते हैं और सवाल पूछने वाला हक्काबक्का रह जाता है। खास तो यह कि ऐसा करते समय वह एक के ऊपर कोई दूसरा बर्तन नहीं रखते हैं।
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निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी के कप, फूलदान, पेन स्टैंड शिल्प मेलों के जरिए आज दुनिया के कोने-कोने में पहुंच चुके हैं। मगर आजमगढ़ के निजामाबाद के तालाबों की मिट्टी से बने इन बर्तनों को इतना सूक्ष्म रूप भी दिया जा सकता है, इसकी कल्पना किसी को नहीं होगी। निजामाबाद पॉटरी के सिद्धहस्त कलाकार और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त राजेंद्र प्रजापति के पुत्र शिवरतन ने ऐसे सूक्ष्म बर्तन बनाना शुरू किया है। लेकिन मिट्टी के बर्तनों को सूक्ष्म रूप देना और वह पूरी डिजाइन के साथ कोई आसान काम न था।
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मगर लगातार अभ्यास से शिवरतन ने इसे कर दिखाया। उनका यह हुनर देख निजामाबाद के शिल्पी भी चकित हैं और दर्शक तो इसकी तारीफ करके नहीं थकते हैं। वह चाहते हैं कि उनका यह कारनामा गिनीज बुक में लिखा जाए। इसके लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं। चावल के दाने पर किसी नाम को 10 बार लिख सकने का उनका हुनर इसमें खास मददगार है। शिवरतन बताते हैं कि शिल्प मेलों से बहुत से लोग सजावट के लिए ब्लैक पॉटरी खरीदते हैं।
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मेलों में ले जाते समय कई बार बर्तन टूट जाया करते थे। तब सोचा कि क्यों न इतने छोटे बर्तन बनाए, जिसे दुनिया के किसी भी कोने में आसानी से पहुंचाया जा सके। उसके बाद उन्होंने टी सेट, डिनर सेट, फ्लावर पॉट, अगरबत्ती स्टैंड, धूप रानी, कटोरी, थाली, गिलास, लोटा, हुक्का आदि को छोटा रूप देना शुरू किया। धीरे-धीरे वे उसे और छोटा बनाते गए।
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निजामाबाद स्थित राजेंद्र नगर में कुम्हारों के 50 परिवार मिट्टी के बर्तन बनाते हैं। इनके बर्तनों की रंगत इन्हें खास बनाती है। यह कला वर्ष 1636 ईस्वी में निजामाबाद में विकसित हुई। गुजरात के कच्छ से कुम्हारों का एक परिवार को निजामाबाद में आकर बसा। यहां की मिट्टी की खासियत के चलते उन्होंने ब्लैक पॉटरी की नई कला विकसित कर दी। आज निजामाबाद की कला को पेटेंट भी हासिल हो चुका है।
शिवरतन के पिता राजेंद्र प्रजापति लंदन, पेरिस, डेनमार्क, स्विजरलैंड सहित 14 देशों में निजामाबाद पॉटरी की कलाकृतियों का प्रदर्शन कर चुके हैं। वर्ष 1987 में राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने उन्हें नेशनल अवार्ड दिया था। निजामाबाद पॉटरी क्षेत्र के तालाबों की काली मिट्टी से बनाई जाती है लेकिन सरकार की अनदेखी के चलते काली मिट्टी के पोखरों पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। मिट्टी की किल्लत से इस हुनर पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।