यूपी के बलिया जिले के बैरिया सीट से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह अपने बयानों के लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार वो फिर चर्चा में हैं लेकिन बयान के लेकर नहीं। शनिवार को बलिया में विधायक सुरेंद्र सिंह की डीआईओस के साथ विवाद और झड़प हो गई। घटना के बाद से बलिया का माहौल गरम है। विधायक के साथ यह नई बात नहीं है। बैरिया विधायक का डीआईओएस से भिड़ना, अफसरों के साथ उनके दुर्व्यवहार की पहली घटना नहीं है। आगे की स्लाइड्स में देखें पांच बड़े विवाद
विज्ञापन
2 of 6
विधायक और डीआईओएस में हाथापाई
- फोटो : amar ujala
पांच अक्टूबर 2017 की रात में बैरिया क्षेत्र के चिरैया मोड़ पर वन विभाग के दारोगा संतोष कुमार पर अवैध वसूली का आरोप लगाकर विधायक सुरेंद्र सिंह एवं उनके समर्थकों ने पीट दिया था। इसके चलते वन दारोगा का बायां पैर टूट गया था। जब विधायक से मारपीट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आरोप निराधार बताए थे। साथ ही वन दारोगा और कर्मचारियों पर अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए उनके निलंबन की मांग की थी। वन विभाग कार्यालय पर धरना शुरू कर दिया था।
विज्ञापन
3 of 6
धरने पर बैठे विदायक और घायल दारोगा
- फोटो : अमर उजाला
27 सितंबर 2017 को बैरिया तहसील के तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक दिलीप सिंह के साथ मारपीट व 16 जनवरी 2018 को बैरिया तहसील के तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक सूर्यनाथ से भी दुर्व्यवहार किया है। विधायक ने पूर्ति विभाग के निरीक्षकों पर कोटेदारों को परेशान करने का आरोप लगाया था।
4 of 6
बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह
17 जून 2017 को दोकटी थाना के प्रभारी उपनिरीक्षक वीरेंद्र यादव से बालू को लेकर विवाद हो गया और उपनिरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई के लिए विधायक दोकटी थाना पर धरने पर बैठ गए। 29 मई 2018 को विधायक का एक कानूनगो उमेश श्रीवास्तव पर अवैध तरीके से पैसे मांगने का आरोप लगाने पर विवाद हो गया था। 31 जनवरी 2018 को तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक गुफरान के साथ हुई मारपीट में विधायक का सह बताया गया।
विज्ञापन
5 of 6
भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह
- फोटो : amar ujala
बलिया के डीएम रह चुके सुरेंद्र विक्रम सिंह के साथ भी विधायक सुरेंद्र सिंह की भिड़ंत हो चुकी है। दोनों के बीच बालू खनन को लेकर हुए विवाद का मामला काफी गरमाया था। जनवरी 2017 में जिले की एसपी सुजाता सिंह से विधायक ने जिला छोड़कर चले जाने को कहा था। एसपी पर भी विधायक ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। बता दें कि बालू खनन को लेकर विधायक व उनके समर्थकों का अन्य अफसरों के साथ भी विवाद हो चुका है।
31 मई 2018 को डीएम से मिलकर कहा कि तहसील के सभी अधिकारी भ्रष्ट हो गए हैं। दो दिन बाद कहा कि डीएम संवेदनशील नहीं है और कुछ दिनों बाद डीएम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विधायक ने मोर्चा खोल दिया। विधायक यहीं नहीं रुके और कहा कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी घूस मांगता है तो उनको घूंसा दो और नहीं मानता है तो जूता दो।