वाराणसी नगर निगम में कार्यकारिणी के चुनाव के लिए शनिवार को बुलाई गई सदन की बैठक बमुश्किल सात मिनट चली और फिर सदन से सड़क तक शुरू हुआ हंगामा दस घंटे से भी ज्यादा चला। नगर निगम के इतिहास में हंगामा, बवाल, तोड़फोड़ और धक्कामुक्की की यह पहली घटना है। विरोध की शुरुआत शोक प्रस्ताव के बाद सदन स्थगित करने की घोषणा के साथ हुई। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
विरोध और हंगामा इतना बढ़ गया कि सपा, कांग्रेस और बसपा के पार्षद शोरशराबा और नारेबाजी करते हुए सभापति एवं महापौर मृदुला जायसवाल के आसन तक पहुंच गए। सभापति की कुर्सी घेर ली और चुनाव कराने की मांग पर अड़ गए। हंगामे के बीच महापौर बाहर निकलने लगीं तो विपक्षी पार्षदों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। कुर्सियां उठाकर फेंकने लगे। टेबल और माइक भी तोड़ दिया। किसी तरह भाजपा पार्षदों ने अपने सुरक्षा घेरे में महापौर को सदन से बाहर निकाला।
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महापौर जब घर जाने लगीं तो विपक्षी पार्षद उनकी गाड़ी के सामने लेट गए। बचाव में पहुंचे भाजपा के पार्षदों के साथ कांग्रेस और सपा के पार्षदों ने जमकर धक्कामुक्की की। खींचातानी के बीच महापौर की गाड़ी के आगे का शीशा और झंडा टूट गया। हंगामे से नाराज महापौर गाड़ी से उतरकर वापस सांस्कृतिक संकुल में एक पेड़ के नीचे आकर खड़ी हो गईं। विपक्षी यहां भी उन्हें घेरकर हंगामा करने लगे। नाराज महापौर पैदल ही घर के लिए निकल पड़ीं। तब आगे-आगे सपा और कांग्रेस के पार्षद विरोध और नारेबाजी करते चल दिए।
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बीच सड़क हंगामे से चौकाघाट रोड पर जाम लग गया। महापौर भाजपा पार्षदों और पुलिस की सुरक्षा के बीच तेलियाबाग तक पहुंचीं। हालात अनियंत्रित होते देख हंगामा करने वालों पर यहां पुलिस ने लाठियां भांजीं और उन्हें पकड़कर अपनी गाड़ी से कैंट थाने ले गई। थाने पर रात दस बजे तक विपक्षी दलों के नेताओं का जमावड़ा लगा था। एक पार्षद प्रतिनिधि समेत चार को पुलिस अपनी हिरासत में बैठाए हुए थी।
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बवाल के दौरान मेयर को घेरकर नारेबाजी करते विपक्षी पार्षद
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मामले में प्रभारी नगर आयुक्त मोती सिंह की तहरीर के आधार पर पार्षद प्रशांत सिंह पिंकू, अविनाश यादव, कमल पटेल, सीताराम केशरी, अंकित यादव, भैया लाल, अवनीश यादव, बबलू शाह, सुनील यादव, अरशद लड्डू और पूर्व पार्षद अजीत सिंह के अलावा 10 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। हिरासत में लिए गए प्रतिनिधियों को आज को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
सपा पार्षद दल के नेता कमल पटेल का कहना है कि भाजपा को हार का डर था। इस नाते सुनियोजित तरीके से उन्होंने कार्यकारिणी के चुनाव को स्थगित कर दिया। पार्षद और महापौर के बीच विचारों की लड़ाई होती है। इस मामले को तूल देकर भाजपा चुनाव टालना चाहती है। उधर भाजपा पार्षद दल के नेता राजेश जायसवाल ने बताया कि साथी पार्षद की पत्नी की मौत के बाद वह वोट डालने नहीं आ सकता था। इस नाते चुनाव स्थगित किया गया। यह चुनाव अगली बैठक में तारीख तय कर कराया जाता। जिस प्रकार से सपा कांग्रेस ने किया वह निंदनीय है। इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
महापौर संग हुई घटना से क्षुब्ध भाजपा पार्षदों ने डीएम और एसएसपी को हटाने की मांग की है। भाजपा के मुख्य सचेतक राजेश, पार्षद विनीत, विनोद भारद्वाज, अजय गुप्ता आदि ने मेयर संग हुई घटना के लिए जिला प्रशासन की चूक मान रहे हैं। पर्याप्त व्यवस्था की जाती तो इस प्रकार की घटना नहीं होती।
वहीं बीच सड़क विपक्षियों के हंगामे के चलते चौकाघाट मार्ग पर करीब घंटे भर तक जाम की स्थिति बनी रही। स्थिति अनियंत्रित होती देख पुलिस के लाठी भांजने पर जब हंगामा करने वालों की भीड़ हटी तब जाकर आवागमन धीरे-धीरे सामान्य हुआ।