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बीएचयू: पूर्वांचार्य संगीत समारोह में कला साधकों ने गायन और वादन से दी भावांजलि

Thu, 06 Feb 2020 02:59 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पूर्वांचार्य संगीत समारोह में मौजूद कला साधक। - फोटो : अमर उजाला।
बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में चल रहे पूर्वांचार्य संगीत समारोह में शिक्षकों, कलाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देखने को मिल रही है। संकाय प्रमुख प्रो. राजेश शाह के निर्देशन में चल रहे पांच दिवसीय समारोह के तीसरे दिन गुरुवार को गायन, वादन, नृत्य के माध्यम से शिक्षक पूर्व आचार्यों को अपनी भावांजलि दी।
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पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में प्रो. संगीता पंडित और प्रो. रेवती साकलकर ने प्रार्थना यज्जा कृतो दूरं मुदइति देवम की प्रस्तुति से कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद अनुराधा रतूड़ी ने पंडित रमाकांत गुंदेचा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
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उधर संकाय के शिक्षक डॉ. प्रेम किशोर मिश्र ने सितार वादन में राग परमेश्वरी में अलाप, जोड़ और गत की मनोहारी प्रस्तुति दी। तबले पर पंडित कुबेर नाथ मिश्र ने संगत की। श्यामा कुमारी ने गायन में राग मधुवंती की प्रस्तुति कर सभी की तालियां बटोरी। तबले पर पंकज राय और हारमोनियम पर विक्की कुमार ने संगत की।

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अखियां मोरी देखन हरि को तरसे
इससे पहले बुधवार को ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में पहली प्रस्तुति में डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय ने राग तोड़ी में विलंबित एकताल में ख्याल अखियां मोरी देखन हरि को तरसे को गाया। इसके बाद तीनताल में निबद्ध बीन अनाहत बाजे री और अंत में भजन सुन सुन साधो जी राजा राम कहो से प्रभु का गुणगान किया।
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उनके साथ सारंगी पर अनीश मिश्र, हारमोनियम पर विक्की कुमार, तबले पर पं. कुबेर नाथ मिश्र के साथ ही गायन में अक्षत प्रताप सिंह और प्रियांशु घोष ने संगत की। इसके बाद सतीश कुमार सिंह ने बांसुरी वादन में राग शुद्ध सारंग में विलंबित एकताल में बंदिश तथा द्रुत तीनताल में बंदिश की प्रस्तुति दी।
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तीसरी प्रस्तुति में डॉ. स्वर वंदना शर्मा ने राग गौड़ सारंग में विलंबित एकताल में कजरारे गोरी तोरे नैन, तीनताल में पियु पलन लागी मोरी अंखियां और द्रुत आड़ा चौताल में नित गुनी संग बैठ-बैठ की मनमोहक प्रस्तुतियां दी।
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डॉ.बी सत्यवर ने बजाया मृदगंम
बुधवार को ही डॉ. बी सत्यवर प्रसाद ने सितार में डॉ. आनंद कुमार मिश्र के साथ मिलकर मृदंगम की प्रस्तुति दी। डॉ. प्रसाद ने ताल आदितालम् में शब्दपल्लवी की प्रस्तुति की। शास्त्रीय गायन में डॉ. विजय कपूर ने राग रागेश्वरी में विलंबित एकताल में बंदिश ऐसी बनी छवि रागेश्वरी की, झपताल में बंदिश हरि नाम कर गान और द्रुत एकताल में बंदिश प्रथम सुमिर श्री गणेश की सुंदर प्रस्तुति की।
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डॉ. रामशंकर ने राग किरवानी में विलंबित रूपक में बंदिश सुधि लीजिए दाता मोरी और द्रुत एकताल में बंदिश मुकुट वारो सांवरो के बाद भजन मन रे परसि हरि के चरन की प्रस्तुति दी। दूसरे दिन की अंतिम प्रस्तुति में खिलेश्वरी पटेल ने भरतनाट्यम शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति से सभी का मन मोहा। इससे पहले डॉ. मधुमिता भट्टाचार्या ने प्रार्थना कराई।
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