बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल आज दूसरे दिन भी जारी है। बुधवार सुबह आठ बजे शुरू हुए इस हड़ताल के कारण अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है। हजारों मरीजों और तीमारदारों को खासी मुसीबत झेलनी पड़ रही है। हड़ताल की वजह से ऑपरेशन भी टाल दिए गए। ट्रॉमा सेंटर में भी कामकाज प्रभावित है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
यह हालत तब है जब जूनियर डॉक्टरों से वार्ता के बाद मंगलवार शाम पांच बजे कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हड़ताल खत्म होने का दावा किया था। लेकिन बाद में शाम छह बजे जूनियर डॉक्टरों की जनरल बॉडी मीटिंग में हड़ताल जारी रखने का फैसला कर लिया गया। आज सुबह से ही हड़ताल खत्म करने के लिए बीएचयू में कई उच्च स्तरीय बैठक हुई है। कुलपति इस मामले का जल्द से जल्द समाधान चाहते हैं।
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मंगलवार को सर्जरी विभाग की ओपीडी में इलाज कराने गए शास्त्री तृतीय वर्ष के छात्र आकाश मिश्रा की डॉक्टरों ने पिटाई कर दी। इससे उसका सिर फट गया था। मामले में लंका पुलिस ने आकाश की तहरीर पर अज्ञात जूनियर डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। जानकारी होने पर जूनियर डॉक्टरों ने बुधवार को हड़ताल पर जाने की नोटिस दे दी थी।
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जूनियर डॉक्टरों की मांग है कि जब तक छात्र पर मुकदमा दर्ज कर उसे निलंबित नहीं किया जाएगा, वे हड़ताल खत्म नहीं करेंगे। हालांकि बुधवार को आईएमएस के असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट्स ने मरीज देखे। बता दें कि बीएचयू रोजाना औसतन पांच हजार मरीज आते हैं।
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यह कोई पहला मामला नहीं है, जब अस्पताल में डॉक्टरों और छात्रों से नोकझोंक-मारपीट हुई हो। आए दिन ऐसी घटनाएं होती हैं लेकिन जब भी जूनियर डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज हो जाता है तो वे हड़ताल कर देते हैं। उनका मकसद केवल विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाना होता है। हालांकि मंगलवार की घटना के लिए कौन दोषी है, यह तो जांच होने पर ही सामने आएगा।
वैसे जूनियर डॉक्टरों ने छात्र को बेरहमी से पीटा है। छात्र के लंका थाने पर पहुंचने पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने भी कही। छात्र की तहरीर पर नामजद मुकदमा तो नहीं दर्ज हुआ है लेकिन कार्रवाई के डर से ही जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। उधर, आम दिनों में चार से पांच हजार मरीज जहां आते थे वहीं बुधवार को 2800 मरीजों ने ही ओपीडी में पंजीकरण कराया।