बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में बुधवार को जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इस वजह से दूर दराज से आए मरीजों को इलाज और जांच के लिए न केवल परेशान होना पड़ा बल्कि कईयों को तो बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। मंगलवार को एक छात्र की पिटाई मामले में दर्ज मुकदमे के विरोध में ही जूनियर डॉक्टरों ने यह फैसला लिया था। इस बीच सुबह 8 बजे से हड़ताल की वजह से ओपीडी, आपरेशन, जांच आदि प्रभावित रहे। डॉक्टरों ने कुलपति प्रो. राकेश भटनागर से बातचीत के बाद शाम 5 बजे सर्शत वापस ले लिया। इसमें उन्होंने अपनी मांगें भी कुलपति के पास रखी थी, जिसे माने जाने का उन्होंने आश्वासन दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
विज्ञापन
2 of 6
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को सर्जरी विभाग की ओपीडी में इलाज कराने गए शास्त्री तृतीय वर्ष के छात्र आकाश मिश्रा की डॉक्टरों ने जमकर पिटाई कर दी, इससे उसका सिर फट गया था। मामले में लंका पुलिस ने आकाश की तहरीर पर अज्ञात जूनियर डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज कर लिया।
विज्ञापन
3 of 6
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
इधर इसकी जानकारी होने के बाद से रात करीब 11 बजे ही डॉक्टरों ने बुधवार को हड़ताल पर रहने की नोटिस जारी कर दी थी। हड़ताल की वजह से पूर्वांचल के विभिन्न जिलों, झारखंड, बिहार, मध्यप्रदेश आदि जगहों से आए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी।
4 of 6
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
मरीज अपने परिजनों के साथ अस्पताल परिसर में इधर-उधर बैठे रहे। हालांकि इस दौरान आईएमएस के असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंटों ने मरीज देखा लेकिन दबाव अधिक रहा। उधर जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने की वजह से आपरेशन से लेकर जांच भी प्रभावित रहा।
विज्ञापन
5 of 6
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
कुछ जगहों पर ओपीडी में गए मरीजों को बाद में आने की बात कहकर लौटा दिया गया। आम दिनों में जहां बीएचयू में 4 से 5 हजार मरीज ओपीडी में आते हैं वहीं बुधवार को 2800 मरीज ओपीडी में आए। शाम 5 बजे हड़ताल खत्म होने की घोषणा खुद कुलपति ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में की।
कुलपति प्रो. राकेश भटनागर का कहना है कि आईएमएस निदेशक, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक आदि अधिकारियों से बातचीत करने के साथ ही जूनियर डॉक्टरों से भी बात की गई। उनकी मांग सुनी गई और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इसके बाद उन्होंने हड़ताल वापस लिया।