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भानु सप्तमी 2021: जानें किस उपाय से प्रसन्न होंगे सूर्यदेव और मिलेगी सुख-समृद्धि, चार साल बाद विशेष संयोग

Sat, 14 Aug 2021 07:24 PM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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भानु सप्तमी पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
सृष्टि में प्रकाश और ऊर्जा के संवाहक भगवान भास्कर की पूजा से समस्त संकट दूर होते हैं। श्रावण शुक्लपक्ष की सप्तमी पर सूर्य पूजन से सभी परेशानियां दूर होती हैं। कहते हैं कि इस दिन अगर कोई भक्त सच्चे मन से सूर्य भगवान की उपासना करता है, तो सूर्यदेव उसके सभी दु:ख को दूर कर देते हैं। सूर्यदेव को ऊर्जा का प्रतीक कहा गया है। भानु सप्तमी के दिन सूर्य स्त्रोत का पाठ करने और सुनने वाले भक्तों को बहुत लाभ होता है। सूर्यदेव का स्थान नौ ग्रहों में सबसे श्रेष्ठ है। ग्रंथों के मुताबिक, इस महीने सूर्य का विशेष पूजन करना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो रविवार को सप्तमी तिथि होने से भानु सप्तमी का योग बनता है। सावन में चार साल बाद भानु सप्तमी का संयोग बन रहा है। तो आइए जानते हैं कि इस दिन किस विधि से पूजा करने से प्रसन्न होते हैं सूर्यदेव...
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ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र ने बताया कि 15 अगस्त, रविवार को भानु सप्तमी का योग बन रहा है। इससे पहले 30 जुलाई 2017 को ऐसा हुआ था जब रविवार को सावन महीने के शुक्लपक्ष की सप्तमी थी। अब तीन साल बाद 11 अगस्त 2024 में ऐसी स्थिति बनेगी। पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत करने से आपकी सारी मनोकामना पूरी होगी।
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जानें पूजा के विशेष लाभ
भानु सप्तमी पर सूर्य को जल चढ़ाने से बुद्धि का विकास होता है और मानसिक शांति मिलती है। वह व्यक्ति कभी भी अंधा, दरिद्र, दुखी नहीं रहता। सूर्य की पूजा करने से मनुष्य के सब रोग दूर हो जाते हैं। भानु सप्तमी के दिन दान करने से पुण्य बढ़ता है और लक्ष्मीजी भी प्रसन्न होती हैं। पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत करने से पिता और पुत्र में प्रेम बना रहता है। इस दिन सामर्थ्य के अनुसार गरीबों और ब्राह्मणों को दान देना चाहिए।

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उगते सूरज को अर्घ्य दें
सूर्योदय से पहले नहाने के बाद तांबे के लोटे में शुद्ध जल भर लें। उसके साथ ही लोटे में लाल चंदन, लाल फूल, चावल और कुछ गेहूं के दाने भी डाल लें। ऊं घृणि सूर्याय नम: मंत्र बोलें और उगते हुए सूरज को इस लोटे का जल चढ़ाएं। इसके बाद भगवान सूर्य को नमस्कार करें। गायत्री मंत्र का जाप करें और हो सके तो आदित्य हृदय स्तोत्र का भी पाठ करें। इसके अलावा भगवान सूर्य के 12 नामों का जाप भी कर सकते हैं।
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बिना नमक का व्रत करने का लें संकल्प
सूर्य के सामने बैठकर दिनभर बिना नमक का व्रत करने का संकल्प लें। संभव हो तो पूरे दिन तांबे के बर्तन का पानी पीएं। पूरे दिन व्रत रखें और फलाहर में नमक न खाएं। एक समय भोजन करें तो उसमें भी नमक का इस्तेमाल न करें। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धानुसार भोजन, वस्त्र या कोई भी उपयोगी वस्तु दान करें। गाय को चारा खिलाएं और अन्य पशु-पक्षियों को भी खाने के लिए कुछ दें।
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