इससे पहले बनारसी साड़ी और ब्रोकेड, भदोही कार्पेट, लकड़ी के खिलौने, मेटल रेपोजी, गुलाबी मीनाकारी, ग्लास बीड्स, ब्लैक पाटरी, गाजीपुर वाल हैंगिंग, सॉफ्ट स्टोन जाली क्राफ्ट, मिर्जापुर दरी जीआई पंजीकृत उत्पाद हैं। डॉ. रजनीकांत के अनुसार मौजूदा समय में देश के विभिन्न हिस्सों में 1000 शिल्पी चुनार के बलुआ पत्थर पर नक्काशी उकेरने का काम कर रहे हैं और इसका सालाना कारोबार लगभग 2000 करोड़ रुपये का है। सरकार के इस प्रयास से अब इस प्राकृतिक उत्पाद को सही मायने में संरक्षित किया जा सकेगा।