दक्षिण भारतीय शैली का है मंदिर
महंत राजनाथ तिवारी के अनुसार मंदिर का जीर्णोद्धार 1908 में मद्रासियों ने कराया। गर्भगृह को छोड़कर मंदिर का अन्य भाग दक्षिण भारतीय मंदिर शैली का बना हुआ है। मंदिर के बाहरी भाग पर रंग-बिरंगे रूप में गणेश, शंकर समेत कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां बनी हुई हैं। यहां की शक्ति विशालाक्षी माता तथा भैरव काल भैरव हैं। मंदिर में भादों मास पर भव्य आयोजन किया जाता है। माह की कृष्ण पक्ष तृतीया को मां विशालाक्षी का जन्म दिन धूम-धाम से मनाया जाता है। चैत्र नवरात्र में मां के दर्शन-पूजन के लिए भी श्रद्धालु उमड़ते हैं। नवरात्र की पंचमी को नौ गौरी स्वरूप में भी मां विशालाक्षी का दर्शन होता है। जिससे सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और सुख, समृद्धि व यश बढ़ता है।