वाराणसी में बृहस्पतिवार को विश्व शांति एवं राष्ट्र कल्याण की मंगलकामना के साथ कालभैरव की 72वीं दिव्य शोभायात्रा निकली। इस दौरान आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। वहीं शोभायात्रा में मनमोहक झांकियों ने भक्तों का दिल जीत लिया।
आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष द्वितीया बृहस्पतिवार को बाबा कालभैरव ने भक्तों को स्वर्ण-रजत स्वरूप में दर्शन दिए। 365 दिन में इसी दिन बाबा नगर भ्रमण पर निकलते हैं। उन्होंने 17 घंटे नगर भ्रमण कर भक्तों को दर्शन दिए। चौखंभा स्थित काठ की हवेली से निकली 72वीं शोभायात्रा में बाबा कालभैरव के साथ घोड़े पर देवों के स्वरूप और वैष्णो देवी की झांकी शामिल थी। राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने भी बाबा का दर्शन किए।
काठ की हवेली पर काशी स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी के अध्यक्ष घनश्याम सेठ, महामंत्री राजू वर्मा, कोषाध्यक्ष विक्रम सिंह, शोभायात्रा मंत्री जनार्दन वर्मा एवं कमेटी के पदाधिकारियों ने बाबा की आरती उतारी। इसके बाद शोभायात्रा शुरू हुई।
शोभायात्रा में आगे धर्म ध्वजाएं लहरा रही थीं। पीछे ताशा, पाइप बैंड, 11 छत्रधारी अश्वों पर सवार देवस्वरूप, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, मां काली, मां दुर्गा और श्रीहनुमान के सजीव स्वरूप श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रहे थे।
माता वैष्णो देवी तथा गोविंदेश्वर महादेव की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। शोभायात्रा के कमेटी के संस्थापक स्व. किशुनदास जी एवं स्व. भिखू सेठ की सुसज्जित झांकी श्रद्धांजलि स्वरूप साथ चल रही थी।
शोभायात्रा बीबीहटिया, जतनबर, विशेश्वरगंज, महामृत्युंजय, दारानगर, मैदागिन, बुलानाला, चौक, नारियल बाजार, गोविंदपुरा, ठठेरी बाजार, सोराकुआं एवं गोलघर होते हुए श्रीकाल भैरव मंदिर पहुंची। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा की भव्य महाआरती हुई और प्रतिमा को पुनः मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया।
शाम को पं. जय कृष्ण दीक्षित के आचार्यत्व में 11 वैदिक ब्राह्मण श्रीराम मंदिर में बसंत पूजन कर विविध अनुष्ठान किए। रात में 12 बजे महाआरती तक हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया।
शोभायात्रा में संरक्षक श्याम सुंदर सिंह, किशोर सेठ, ईश्वर दयाल सिंह सेठ, महामृत्युंजय मंदिर महंत किशन दीक्षित, शिव गोपाल सर्राफ, अनुज गौतम, संदीप सेठ, जितेंद्र सेठ, संजय सेठ, महेश सिंह, जनार्दन वर्मा, संदीप सेठ, डॉ. कैलाश सिंह विकास आदि शामिल रहे।