यूपी के आजमगढ़ में एक गांव के एक घर में भोज कार्यक्रम के दौरान गैस सिलेंडर लीक होने से लगी आग में छह लोगों की मौत हो गई। जब गैस सिलेंडर लीक होने से आग लगी तो मौके पर मौजूद महिलाएं और बच्चे जिस कमरे में खुद को बचाने के लिए गए, लेकिन उनको क्या पता था कि यही कमरा उनके लिए काल की कोठरी बन जाएगी। आगे की स्लाइड्स में देखें...
2 of 6
azamgarh
- फोटो : अमर उजाला
घटना को लेकर गांव की महिलाएं पूछने पर पर सिर्फ यह ही कर रही थी कि काश आग से बचने के लिए महिलाएं कमरे में न गई होतीं। महिलाओं का कहना था कि सब कुछ इतना अचानक हुआ कि किसी की नजर ही कमरे में धुआं भरने की ओर नहीं गया। भूसा में आग लगने पर लोग पहले आग बुझाने में जुट गये थे। कमरे में महिलाओं और बच्चों के होने का अंदेशा यदि होता तो शायद लोग उनको बचाने के लिए जुट जाते।
3 of 6
azamgarh
- फोटो : अमर उजाला
वहीं लोग शुक्र मना रहे हैं कि गैस रिसाव के चलते सिर्फ आग ही लगी। यदि कहीं सिलेंडर फट गया होता, तो मरने वालों की संख्या कहीं और ज्यादा होती। हादसे में जो भी मौत हुई है वह सिर्फ आग लगने के बाद कमरे में धुआं भर जाने और धुंए से दम घुटने से हुई है।
4 of 6
azamgarh
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि जिले के रानी की सराय थाना क्षेत्र के कोटवा चक बंगाली गांव में सोमवार को दिन में भंडारे के लिए बन रहे भोजन के दौरान सिलेंडर रिसने से पास रखे भूसे में आग लग गई। आग का धुआं टीन शेड वाले कमरे में भर गया। जिससे दम घुटने से दो मासूम समेत छह लोगों की मौत हो गई। दरअसल, कोटवा चक बंगाली गांव की निवासी 80 वर्षीया रामताजी देवी पत्नी स्व. बलेश्वर ने गुरुमंत्र लिया था। इसी उपलक्ष्य में घर पर भंडारे का आयोजन किया था। जिसमें काफी लोग आए हुए थे।
5 of 6
azamgarh
- फोटो : अमर उजाला
धुएं में दम घुटने से दो मासूम समेत छह की मौत से रानी की सराय थाना क्षेत्र के कोटिला चक बंगाली गांव मातमी सन्नाटा पसर गया। सभी आंख के सामने हुई घटना को लेकर गमगीन नजर आये। गांव के पुरूष सदस्य तो अस्पताल चले आये थे और महिलाएं कार्यक्रम स्थल पर ही जुट कर रो-बिलख रही थी।
रानी की सराय थाना क्षेत्र के कोटवा गांव की घटना
- फोटो : अमर उजाला
गांव की बुजुर्ग महिलाओं में शामिल 80 वर्षीया रामताजी देवी पत्नी स्व. बलेश्वर के गुरुमंत्र लेने के बाद आयोजित भंडारे को लेकर पूरे गांव में सोमवार की सुबह से ही जश्न जैसा माहौल था। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गांव की महिलाएं रामताजी देवी के घर पर जुटी हुई थी। वहीं बाहर से भी कई नाते रिश्तेदार भी आये थे। जिस कमरे में आग से जान बचाने के लिए महिलाएं और बच्चियां घ़ुसी थी। उस कमरे में धुंआ भरने से दम घुटने के कारण वही जगह उनके लिए काल का घर साबित हुई।