जिस बच्चे का नाम रखा गया था 'आपातकाल' वो है आज भाजपा विधायक। आखिर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने क्यों रखा था नाम उस बच्चे का आपातकाल? कौन है वो भाजपा विधायक जिसे अटल जी ने कहा था 'आपातकाल'? जानिए यह सबकुछ आगे की स्लाइड्स में...
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Atal Bihari Vajpayee
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पूर्व वित्त मंत्री हरीशचंद्र श्रीवास्तव के पुत्र और मौजूदा कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव का नाम ‘आपातकाल’ रखा था। विधायक ने बताया कि आपातकाल के दौर में जब गैर कांग्रेसी नेताओं की धरपकड़ शुरू हुई तो वाजपेयी ने पिता से कहा था कि तुम गिरफ्तारी मत देना। इसी दौरान मेरा जन्म हुआ। आपातकाल खत्म होने के बाद जब वाजपेयी घर आए तो उन्होंने मेरा नाम ‘आपातकाल’ रखा था।
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saurabh srivastav
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि आपातकाल का दौर काफी कष्टदायी था। पिताजी वेश बदलकर घर आते थे। कार्यकर्ताओं की मदद करते थे। सब कुछ वाजपेयी के निर्देशन में होता था। मेरी माता पूर्व विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव पर नजर रखने के लिए घर के बाहर पुलिस लगा दी गई। पिता की तलाश में आने वाले पुलिस अधिकारी परेशान करते थे। घर की कुर्की कर दी गई। दरवाजे और खिड़कियां तक पुलिस वाले उठा ले गए।
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- फोटो : facebook
वाजपेयी के निर्देशन पर पिता किसी तरह कार्यकर्ताओं के जरिए मां को घर का खर्च चलाने के लिए पैसे भेजते थे। पूर्व सांसद शंकर प्रसाद जायसवाल के चुनाव प्रचार करने 2004 में भी वाजपेयी बेनियाबाग में आए थे। सौरभ श्रीवास्तव ने अपने पिता हरीश चंद्र श्रीवास्तव को याद करते हुए कहा कि वो अटल जी से बहुत ज्यादा प्रभावित थे।
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- फोटो : अमर उजाला
वहीं यूपी के पूर्व मंत्री हरीश चंद्र श्रीवास्तव की पत्नी और पूर्व विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव ने मीडिया से कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व अद्भुत है। आज जब उनके बीमार होने की खबरें देख रही हूं तो वह सारी बातें एकदम से सामने आ रही हैं, जो उन्होंने वाराणसी में उनके या उनके पति के साथ रहने के दौरान हुई थीं। वर्तमान विधायक की मां और पूर्व विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव बताती हैं कि उन्हें वह दिन आज भी याद है, जब 1989 में पहली बार वह कैंट विधानसभा से चुनाव लड़ने जा रहीं थीं।
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atal bihari
- फोटो : twiiter
उस वक्त कलराज मिश्र ने फोन कर उन्हें नामांकन भरने की बात कही थी। इस पर उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किया और चुनाव चिन्ह सबमिट करने के बाद जब प्रचार में लगी हुईं थीं तभी एक दिन वाजपेयी जी का आना हुआ। जब अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात की तो वह नाराज हो गए। उन्होंने ज्योत्सना जी को डांट लगाते हुए कहा कि तुमने किससे पूछकर नामांकन किया और क्यों किया? जब उन्हें सारी बात बताई तो वह बिना बोले चले गए, लेकिन जब वह उस चुनाव में जीत गईं तो 1991 में दोबारा चुनाव की स्थिति को देखते हुए अटल जी ने उन्हें ही चुनाव लड़ने के लिए कहा। उस वक्त भी ज्योत्सना श्रीवास्तव ने जीत हासिल की।
ज्योत्सना श्रीवास्तव ने बताया कि उनसे जुड़ी स्मृतियां बहुत सी हैं। जब भी वह बनारस आते थे तो उनके परिवार से जरूर मिलते थे। हरीश जी उन्हीं के साथ अक्सर रहा करते थे। हवाई अड्डे से लेकर होटल और सर्किट हाउस में उनके साथ उन्हें परिवार के किसी न किसी शख्स की मौजूदगी रहती थी। फिलहाल ज्योत्सना का कहना है कि वह जल्द स्वस्थ हो जाएं ऐसी हमारी कामना है।