प्रो. प्रभाकर ने बताया कि साढ़े चार मीटर तक की खुदाई में 50 कच्चे लोहे की भट्ठियां जो लौह अयस्क को गलाने में प्रयुक्त होती थी पाई गई हैं। कच्चे लोहे के बाणाग्र, चाकू, कीलें, छेनी, हथौड़ी, कुल्हाड़ी तथा फसल काटने की हसियां तथा भाले तथा गांगेय क्षेत्र के प्रथम चरण के विकास के दौर की शीशे की चूड़ियां एवं हड्डियों के औजार तथा पत्थर के हथौड़े, सील, लोढ़े, लघु पाषाण उपकरण, पत्थर के मनके प्राप्त हुए हैं। इनसे नदी किनारे की सभ्यता और लौह काल को समझने में मदद मिलेगी।