अक्षय तृतीया पर 11 साल बाद सर्वार्थ सिद्धि का योग बन रहा है। 24 घंटे तक रहने वाले इस योग के दौरान अक्षण पुण्य की प्राप्ति के लिए दान और शुभकर्म किए जाएंगे। ज्योतिष के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चन्द्रमा अपने सम्पूर्ण उच्च क्षमता के साथ अपनी चमक पूरी धर व उस पर रहने वाली सभी प्राणियों पर बिखेरते हैं। कुछ आसान उपायों को अपना कर आप आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। श्री काशी विद्वत परिषद और ज्योतिष के विद्वानों ने इसके लिए कुछ उपाय बताए हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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18 अप्रैल को पड़ने वाले अक्षय तृतीया की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। श्री काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री पं. दीपक मालवीय ने बताया कि वैशाख शुक्ल अक्षय तृतीया का हिन्दू संस्कृति में बड़ा महत्व हैं। इस बार अक्षय तृतीया पर 11 साल बाद 24 घण्टे का सर्वार्थसिद्घि योग का महायोग बना रहा हैं। इस दिन किये जाने वाले शुभ कार्य एवं दान का फल अक्षय होता हैं।
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अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त 18 अप्रैल को सुबह 4:47 से शुरू होकर अगली सुबह 3:03 बजे तक रहेगा। बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार अक्षय तृतीया पर लक्ष्मी योग, विमल योग एवं सर्वार्थसिद्धियोग का विशिष्ट संयोग बन रहा है।
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बुधवार के दिन तृतीया का योग होने से महापुण्यप्रदा है। हमारे वैश्य समाज ने इस दिन को व्यापारिक लाभ कामना से गलत रूप में परिभाषित कर समाज को गुमराह कर अंधाधुंध खरीदारी को प्रलोभित किया। इसलिए अंधाधुंध खरीददारी से बचें।
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अक्षय तृतीया
मां लक्ष्मी की सबसे ज्यादा प्रिय चीज़ दक्षिणवर्ती शंख को लाना चाहिए। इससे घर में धन का इजाफा होता है। देवी लक्ष्मी को कौड़ी बहुत प्रिय होती हैं। इसलिए इस दिन से नियमित रूप से केसर और हल्दी के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से आर्थिक परेशानियों से निजात मिल जाती है।
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- फोटो : अमर उजाला
अक्षय तृतीया का पौराणिक मान्यता हैं कि भगवान परशुराम ने विष्णु के छठे अवतार के रूप में जन्म लिया था। यह दिन परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता हैं। वेद व्यास जी ने इसी दिन गणेश जी के साथ महाभारत लिखने की शुरूआत की थी। इस दिन भगवान कृष्ण जी ने अपने मित्र सुदामा को महल और धन-धान्य दान से परिपूर्ण कर दोस्ती का फर्ज पूरा किया था।
अक्षय तृतीया के दिन गौ, भूमि, स्वर्ण, तिल, घी, वस्त्र, चाँदी, नमक, शहद, धान्य, गुड़ और इन चीजों का दान करने का महत्व हैं। जो भी भूखा हो वह अन्न का पात्र हैं।