हर कोई नए साल में नई उम्मीदों और खुशियों की कामना करता है लेकिन उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एक परिवार को सूर्योदय ही देखने को नहीं मिला। एक हादसे ने परिवार के सात सदस्यों की जिंदगियां छीन ली। जिससे पूरे गांव में कोहराम मच गया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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chandauli
- फोटो : amar ujala
जिले के इलिया थाना क्षेत्र के मालदह गांव में मंगलवार तड़के पशुओं से लदा ट्रक अनियंत्रित होकर कच्चे मकान में जा घुसा। हादसे में घर में सो रहे एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे एक पुरुष दो महिला शामिल हैं। घटना में गंभीर घायल दो लोगों को जिला अस्पताल भेजा गया। एसपी ने सीओ के खिलाफ पत्र शासन को लिखा जबकि थानाध्यक्ष सहित एसआई और पांच पुलिस कर्मी और डायल 100 पर तैनात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।
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झोपड़ी में घुसा ट्रक
- फोटो : amar ujala
परिवार के सात लोगों की मौत के पीछे पुलिस की सबसे बड़ी नाकामी सामने आई है। भले ही डैमेज कंट्रोल के लिए एसपी ने कार्रवाई की है। लेकिन पशु और शराब तस्करी में शामिल लोगों पर लगाम लगाने में नाकाम हुए हैं। इससे कहीं न कहीं पुलिस की वर्दी पर गहरा दाग लगा है और कानून व्यवस्था के रखवालों की कार्यशैली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
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घटना के बाद पहुंचे अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में मालदह में हुई घटना के दौरान मासूमों के शव को देख पूरा महौल गमगीन हो गया। वहां सभी की आंखें भर गईं। लोगों के मुख से बरबस एक ही बोल फूंट रहे थे कि कास मासूम दूसरी जगह सोए होते तो जान बच जाती। आखिर ईश्वर का ये मासूम क्या बिगाड़े थे कि इतना बड़ी सजा दे दी। घटना के बाद हर आंख नम थी।
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर चंदौली कोतवाली के अलावा चकिया व सैयदराजा थाने की फोर्स तैनात रही। शवों के आने की सूचना पर जहां जनप्रतिनिधियों का तांता लग गया, वहीं नगर क्षेत्र के लोग भी पोस्टमार्टम हाउस पर एकत्रित हो गए। देर शाम तक शवों के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी थी। सदर कोतवाल आशुतोष ओझा ने स्वयं शवों के घाव के निशान का अवलोकन करके पंचनामा के दस्तावेज तैयार करने में व्यस्त दिखे वहीं अन्य पुलिस कर्मी भी पोस्टमार्टम से जुड़ी प्रक्रिया को पूर्ण करने में लगे।
आरोप है कि डायल सौ की पीआरवी वैन 3143 द्वारा पशु लदे वाहन का पीछा किया जा रहा था। जिसके बाद ट्रक असंतुलित होकर झोपड़ी में घुस गया। मौके पर पहुंचे डीएम और एसपी को ग्रामीणों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। लेकिन चंद अधीनस्थों पर कार्रवाई करने और पीड़ित के नाम भूमि का पट्टा देने का आश्वासन देकर अधिकारियों ने लोगों को शांत करा दिया। डीएम ने मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपए मुआवजा देने, एक सदस्य को नौकरी देने और प्रधानमंत्री आवास देने की घोषणा की।