पिता हरिकेश यादव ने बताया कि बेटे को छोड़ने के लिए खुद कैंट स्टेशन गए। वहां बेगमपुर एक्सप्रेस ट्रेन में बैठाने के बाद वह घर लौट आए। लेकिन क्या पता था कि बेटा अब दोबारा नहीं आ सकेगा। जाते वक्त अवधेश ने मुझसे कहा था कि बाबूजी अपना ख्याल रखिएगा, अब कौन कहेगा...। गुरुवार की शाम कुछ लोग आए और बताया कि अवधेश का फोन बंद मिल रहा है। शुक्रवार की सुबह शहीद होने की खबर मिली। कहा कि मेरा लाल तो देश के लिए शहीद हो गया, अब कुछ भी घोषणा हो जाए मेरा लाल तो नहीं आ सकता।