उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चौथे चरण के तहत आज वोटिंग हो रही है। इन सीटों पर कुल 624 प्रत्याशियों ने दावेदारी पेश की है, जिनमें 27 फीसदी यानी 167 दागी हैं। 231 करोड़पतियों ने भी चुनाव में ताल ठोंकी है। हालांकि, सीधा मुकाबला भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के बीच है। आइए जानते हैं इन चारों अहम दलों ने कहां से किसे उम्मीदवार बनाया है?
2017 में पीलीभीत जिले की सभी चार सीटें भाजपा ने जीती थीं।
2017 में लखीमपुर की आठों विधानसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीती थीं। गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी यहीं से आते हैं। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा भी लखीमपुर की ही हैं।
हरदोई जिले की सबसे हॉट सीट हरदोई विधानसभा सीट है। 2017 में यहां से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल करने वाले नितिन अग्रवाल इस बार भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं। नितिन को योगी सरकार ने विधानसभा उपाध्यक्ष बनाया था। नितिन के पिता नरेश अग्रवाल राज्यसभा सांसद हैं।
2017 में जिले की सभी सीटें भाजपा ने जीती थीं।
2017 में यहां की आठ सीटों पर भाजपा तो मोहनलालगंज सीट पर सपा को जीत मिली थी। इस बार लखनऊ की सरोजनी नगर सीट इस बार सबसे चर्चित है। यहां से भाजपा ने ईडी के जॉइंट डायरेक्टर रहे राजेश्वर सिंह को मैदान में उतारा है। लखनऊ पूर्व सीट से योगी सरकार के कद्दावर मंत्री आशुतोष टंडन मैदान में हैं। वहीं, लखनऊ कैंट से योगी सरकार में कानून मंत्री बृजेश पाठक चुनाव लड़ रहे हैं।
2017 में सीतापुर जिले की नौ में से सात सीटें भाजपा ने जीती थीं, जबकि एक-एक सीट पर बसपा और सपा को जीत मिली थी।
2017 में जिले की चारों सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। बांदा जिले की चार सीटों में सबसे ज्यादा चर्चा तिंदवारी सीट की हो रही है। यहां से 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले बृजेश प्रजापति स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम चुके हैं। बृजेश को इस बार सपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है, वहीं भाजपा ने रामकेश निषाद को मौका दिया है। बसपा की तरफ से जयराम सिंह और कांग्रेस के लिए आदिशक्ति ताल ठोंक रहे हैं।
2017 में जिले की छह में से पांच सीटें भाजपा और एक सीट उसकी सहयोगी अपना दल को मिली थीं। इस चुनाव में जिले की बिंदकी सीट से योगी सरकार में जेल मंत्री जय कुमार सिंह जैकी चुनाव लड़ रहे हैं। जैकी भाजपा की गठबंधन वाली अपना दल (सोनेलाल) के टिकट पर मैदान में हैं। हुसैनगंज सीट से इस बार भाजपा ने योगी सरकार में कृषिराज्य मंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी भैया को टिकट दिया है। रणवेंद्र पिछली बार भी इस सीट से विधायक चुने जा चुके हैं।
रायबरेली जिले की पांच सीटों में से 2017 में दो-दो भाजपा और कांग्रेस ने जीती थीं। एक सीट पर सपा को जीत मिली थी। यहां से जीतने वाले कांग्रेस के दोनों विधायक इस बार भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली रायबरेली सीट से भाजपा ने इस बार कांग्रेस की ही बागी विधायक अदिति सिंह को मैदान में उतारा है। इसी तरह हरचंदपुर से 2017 में कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले राकेश सिंह इस बार भाजपा के उम्मीदवार हैं।