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UP: मां कैला देवी और बूढ़े बाबा के जयकारे लगवा मोदी ने जीता दिल, जानें क्या है संभलवासियों के लिए इनकी मान्यता

Tue, 20 Feb 2024 12:03 PM IST
विमल शर्मा दुष्यंत कुमार, संभल
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संभल में कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह में भाग लते पीएम मोदी और योगी - फोटो : अमर उजाला

संभल में मां कैला देवी की जय, बूढ़े बाबा की जय के उद्घोष के साथ पीएम नरेंद्र मोदी ने अपना संबोधन शुरू किया। संभल में दोनों धार्मिक स्थलों की बहुत मान्यता है। इनका उद्घोष कर पीएम मोदी ने संभल के लोगों की आस्था को स्पर्श कर अपनत्व का अहसास कराया। पीएम मोदी के मुंह से मां कैला देवी का जयकारा सुनकर सभी लोग जयकारे लगाने लगे और बाद में पूरा पंडाल मोदी-मोदी के नारों से गूंज उठा। 

 
 
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संभल में कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह में भाग लते पीएम मोदी और योगी - फोटो : अमर उजाला
संभल तहसील में गांव मुजाहिदपुर के नजदीक मां कैला देवी का मंदिर है और असमोली में बूढ़े बाबा का बड़ा मेला लगता है। यहां भी एक छोटा सा थान यानी मंदिर है। दोनों स्थानों की संभल में बहुत अधिक मान्यता है। पीएम मोदी ने सभा में मंच पर पहुंचते ही सबसे पहले तीन बार मां कैला देवी की जय, दो बार बूढ़े बाबा की जय और तीन बार भारत माता की जय के नारे लगाए। इसके बाद अपना संबोधन शुरू किया। उसके बाद कल्कि अवतार और आचार्य प्रमोद कृष्णम से अपनी बात आगे बढ़ाई। पीएम मोदी ने 30 मिनट तक भाषण दिया। 
 
 
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संभल में केला देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

भगवान श्री कृष्ण की बहन हैं मां कैला देवी 

मां कैलादेवी के पीठाधीश्वर महंत ऋषिराज गिरि जी महाराज ने बताया कि मां कैलादेवी का स्थल करीब 700 वर्ष पुराना है। मां कैलादेवी यदुवंश की कुलदेवी और भगवान श्री कृष्ण की बहन हैं। मान्यता है कि यहां पर जो भी व्यक्ति सच्ची मुराद लेकर आता है, उसकी मुराद अवश्य पूरी होती है। 

 
 

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संभल में बाबा मंदिर - फोटो : संवाद

बूढ़े बाबा हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक

असमोली में बूढ़े बाबा का थान है। थान के पुजारी शीशराम सिंह प्रजापति ने बताया कि यह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष यहां पर बड़ा मेला लगता है। मान्यता है कि यहां पर प्रत्येक शनिवार, माह मार्गशीर्ष व भादपद्र की द्वितीया तिथि को तालाब में स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु तालाब में स्नान के लिए आते हैं। यहां पर सभी धर्मों के लोग काफी संख्या में आते हैं। 

 
 
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संभल के कल्कि धाम का शिलान्यास समारोह - फोटो : अमर उजाला

गर्भगृह में हुआ छह मिनट पूजन

श्री कल्कि धाम के शिलान्यास कार्यक्रम की तैयारियां सोमवार की सुबह छह बजे से शुरू हो गई थीं। साढ़े सात बजे से गर्भगृह का पूजन शुरू किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिलान्यास के लिए 10.20 बजे कार्यक्रम स्थल पर हेलीकॉप्टर से पहुंचे। इसके बाद वह गर्भगृह में 10.31 बजे पहुंचे। उन्होंने छह मिनट तक नौ शिलाओं का पूजन कर श्री कल्कि धाम की आधारशिला रखी।

इसके बाद उन्होंने श्री कल्कि धाम के मंदिर के मॉडल का लोकार्पण किया। शिलाओं का पूजन महाकाल उज्जैन से  पुजारी पीयूष चतुर्वेदी, विपुल चतुर्वेदी, गोपाल कृष्ण शुक्ला, श्याम सुंदर शर्मा, गौरव शर्मा द्वारा कराया गया। श्री कल्कि धाम की पूर्व शिला नौ शिलाओं के मध्य में स्थापित की गई।

मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ऋतेश्वर जी महाराज, जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि, कैलाशानंद ब्रह्मचारी और आचार्य प्रमोद कृष्णम मौजूद रहे। प्रधानमंत्री का स्वागत स्वामी नवीनानंद जी, स्वामी कल्याणदेव जी, महामंडलेश्वर भईय्यादास जी, महंत दीनानाथ जी, महंत हरमनोज दास जी ने किया। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मंच का संचालन किया।

 
 
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संभल के कल्कि धाम का शिलान्यास समारोह - फोटो : अमर उजाला

22 जनवरी से देश में हुई नए कालचक्र की शुरुआत : मोदी

श्री कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह के बाद लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के संदर्भ में कहा कि 22 जनवरी से देश में नए कालचक्र की शुरुआत हो चुकी है। प्रभु श्रीराम ने जब शासन किया तो उसका प्रभाव हजारों वर्षों तक रहा। उसी तरह से रामलला के विराजमान होने से लेकर अगले हजार वर्षों तक भारत के लिए एक नई यात्रा का शुभारंभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि अमृतकाल में राष्ट्र निर्माण के लिए पूरी सहस्र शताब्दी का ये संकल्प केवल एक अभिलाषा भर नहीं है। ये एक ऐसा संकल्प है, जिसे हमारी संस्कृति ने हर कालखंड में जीकर दिखाया है।
 
 
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संभल के कल्कि धाम का शिलान्यास समारोह - फोटो : संवाद
कहा कि भगवान राम की तरह ही कल्कि का अवतार भी हजारों वर्षों की रूपरेखा तय करेगा। इसी कालखंड में हमने विश्वनाथ धाम के वैभव को निखरते देखा है, काशी का कायाकल्प होते देख रहे हैं। महाकाल के महालोक की महिमा, सोमनाथ का विकास, केदारघाटी पुनर्निर्माण देखा है और अब कल्कि धाम का शिलान्यास हुआ है। पीएम ने कहा कि कल्कि कालचक्र के परिवर्तन के प्रणेता भी हैं और प्रेरणा स्रोत भी हैं।
 
 

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संभल में कल्कि धाम शिलान्यास के दौरान पीएम मोदी और प्रमोद कृष्णम - फोटो : अमर उजाला
भारत को टेक्नोलॉजी और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में संभावनाओं के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। हमारी पहचान इनोवेशन हब के तौर पर हो रही है। हम पहली बार दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जैसे बड़े मुकाम पर पहुंचे हैं। हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने वाले पहले देश बने हैं। पहली बार भारत में वंदे भारत और नमो भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें चल रही हैं। पहली बार बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी हो रही है। पहली बार हाईटेक हाईवे, एक्सप्रेसवे का इतना बड़ा नेटवर्क और उसकी ताकत देश के पास है।
 
 

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संभल के कल्कि धाम का शिलान्यास समारोह - फोटो : अमर उजाला

पिछले दस वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं

पीएम ने अपने संबोधन में पिछले दस वर्षों की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में चार करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घर, 11 करोड़ परिवारों को शौचालय, 2.5 करोड़ परिवारों को घर में बिजली, 10 करोड़ से अधिक परिवारों को पानी के लिए कनेक्शन, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, 10 करोड़ महिलाओं को कम कीमत पर गैस सिलिंडर, 50 करोड़ लोगों को स्वस्थ जीवन के लिए आयुष्मान कार्ड, करीब 10 करोड़ किसानों को सम्मान निधि, कोरोना काल में हर देशवासी को मुफ्त वैक्सीन, स्वच्छ भारत जैसा बड़ा अभियान मिला। आज पूरी दुनिया में भारत के इन कामों की चर्चा हो रही है।

 

 
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संभल के कल्कि धाम का शिलान्यास समारोह - फोटो : अमर उजाला

हमारी शक्ति अनंत है, संभावनाएं भी अपार हैं

पीएम ने कहा कि आज हमारी शक्ति भी अनंत है और हमारे के लिए संभावनाएं भी अपार हैं। पहली बार भारत का नागरिक चाहे वो दुनिया के किसी भी देश में हो, अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता है। देश में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास का ज्वार अद्भुत है। 

 

 
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