सहारनपुर के मेजर मधुर चौधरी ने शादी में शगुन और उपहार लौटाकर दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत संदेश दिया। उन्होंने केवल एक रुपया और नारियल स्वीकार कर समाज के सामने उदाहरण पेश किया।
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मेजर मधुर चौधरी व पत्नी कैप्टन ज्योति
- फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर के सरसावा में भारतीय सेना के मेजर मधुर चौधरी ने अपनी शादी को एक सामाजिक संदेश का माध्यम बनाते हुए दहेज प्रथा के खिलाफ अनोखी पहल की। उन्होंने शादी के दौरान मिले शगुन और उपहारों को लौटाकर केवल एक रुपया और नारियल स्वीकार किया।
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मेजर मधुर चौधरी व पत्नी कैप्टन ज्योति
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दहेज के खिलाफ अनोखा संदेश
मेजर मधुर चौधरी ने अपनी शादी में दहेज प्रथा के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने सभी उपहार और शगुन विनम्रता के साथ वापस कर दिए और केवल प्रतीकात्मक रूप में एक रुपया और नारियल लिया। उनकी इस पहल को समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
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मेजर मधुर चौधरी व पत्नी कैप्टन ज्योति
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परिवार और सैन्य पृष्ठभूमि
मधुर चौधरी की पत्नी ज्योति भारतीय सेना में कैप्टन के पद पर तैनात हैं। दोनों ही उच्च शिक्षित हैं और देश सेवा के प्रति समर्पित हैं। मधुर चौधरी मूल रूप से मीरपुर गांव के रहने वाले हैं और वर्तमान में सरसावा क्षेत्र में निवास कर रहे हैं।
उनके पिता चौधरी ओमपाल सिंह भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने बताया कि मधुर ने बीटेक के बाद संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा पास कर वर्ष 2018 में सेना में शामिल होकर अपने करियर की शुरुआत की।
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मेजर मधुर चौधरी व पत्नी कैप्टन ज्योति
- फोटो : अमर उजाला
बचपन से था स्पष्ट संकल्प
परिजनों के अनुसार, मधुर चौधरी बचपन से ही दहेज प्रथा के खिलाफ थे। उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि वे अपनी शादी में दहेज नहीं लेंगे। अपने इस संकल्प को उन्होंने शादी के अवसर पर पूरी तरह निभाया और समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
समाज में हो रही सराहना
मेजर मधुर चौधरी की इस पहल की चारों ओर सराहना हो रही है। लोगों का मानना है कि ऐसे कदम समाज में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करते हैं और दहेज जैसी कुरीतियों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।