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कवाल कांड के आठ साल: पूरी दुनिया में गूंजा था मामला, दो परिवारों ने खोए थे तीन जवान बेटे, पढ़िए अब कैसे हैं हालात

Fri, 27 Aug 2021 04:51 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर कवाल कांड। - फोटो : amar ujala
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खी बने कवाल कांड को आठ साल बीत चुके हैं। आज गांव के हालात सामान्य हैं, ग्रामीण रोजमर्रा की दिनचर्या में व्यस्त हैं। बाजारों में चहल पहल है। ग्रामीण एक-दूसरे से आपस में बातचीत करते दिखाई देते हैं। गांव का माहौल बिल्कुल सामान्य है। कड़वी याद समझकर लोग उस दिन को भूलना चाहते हैं।

27 अगस्त 2013 की बात है, मलिकपुरा के सचिन और गौरव से हुई कहासुनी और मारपीट में गांव कवाल के शाहनवाज की मौत हो गई थी। गुस्साई भीड़ ने बाजार के चौराहे पर ममेरे भाइयों सचिव व गौरव की हत्या कर दी थी। यहीं कवाल कांड मुजफ्फरनगर दंगे की वजह बना था। इस घटना को आठ साल बीत गए हैं। कवाल के ग्रामीण इस घटना को धीरे-धीरे भूलने लगे हैं। अब बाजारों में भीड़-भाड़ रहती है। ग्रामीण अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं। गांव के बाहर कवाल का मुख्य द्वार है। जहां से ग्रामीणों की आवाजाही रहती है। दुकानदार समय पर अपनी दुकानें खोलते हैं, लोग सामान खरीद रहे हैं। ग्रामीण उस दिन को याद करना नहीं चाहते हैं। हालांकि जिन परिवारों ने अपनों को खो दिया है, उसकी टीस उन्हें ताउम्र रहेगी।
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कवाल निवासी नरेश। - फोटो : amar ujala
जवान बेटों की मौत का गम दिल से नहीं निकलता
कवाल से तीन किलोमीटर दूर बसा मलिकपुरा मजरा में रहने वाले रविंद्र के पुत्र गौरव और बिशन के पुत्र सचिन की हत्या हुई थी। रविंद्र अपनी पत्नी सुरेश के साथ शहर में रहने लगे। उनकी दोनों बेटियों निति और शैली की शादी हो चुकी हैं। मृतक सचिन के पिता बिशन और उनकी पत्नी मुनेश और छोटा बेटा राहुल मलिकपुरा में ही रहते हैं। मृतक सचिन की मां मुनेश कहती हैं, उन्होंने दो जवान बेटे खो दिए। उनकी हत्या को भुलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन दोनों बेटों का गम दिल से नहीं निकलता है। छोटा भाई राहुल कहता है, बड़े भाई सचिन की मौत का गम ताउम्र ही रहेगा। मुनेश ने बताया बहू स्वाति पौत्र गगन को लेकर अपने मायके पुरबालियान में रह रही है।
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कवाल निवासी सलीम। - फोटो : amar ujala
मुझे इंसाफ नहीं मिला: सलीम
कवाल कांड में कवाल निवासी सलीम ने भी अपने बेटे शाहनवाज को खो दिया था। सलीम बूढ़े हो चले हैं, लेकिन घटना की एक-एक बात आज भी उनको याद हैं। सलीम कहते हैं कि कोर्ट से उनको उम्मीद थी कि बेटे शाहनवाज के हत्यारोपियों को सजा जरूर मिलेगी। सभी नामजद हत्यारोपियों को जमानत मिल गई। उनका कहना है कि उसे अभी इंसाफ नहीं मिला। भाजपा सरकार ने भी उसकी कोई मदद नहीं की।

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मोहम्मद युनुस। - फोटो : amar ujala
कवाल में अब किसी तरह का कोई मामला नहीं है। 2013 की घटना को ग्रामीण भूल चुके हैं। गांव में सबकुछ सामान्य है। सभी ग्रामीण आपस में सौहार्दपूर्ण तरीके से रह रहे हैं। - मोहम्मद तैय्यब

कवाल में सभी ग्रामीण आपस में बातचीत करते हैं। एक-दूसरे के घर भी आते जाते हैं। 2013 की घटना के बारे कोई जिक्र भी नहीं करते हैं। उस घटना को ग्रामीण अपने दिलों से निकाल चुके हैं। - मोहम्मद युनुस
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कवाल निवासी सुरेश चंद। - फोटो : amar ujala
कवाल में प्रतिदिन बाजार खुलते हैं। बाजारों में चहल पहल रहती है। कवाल कांड को सभी ग्रामीण धीरे-धीरे भुलाते जा रहे हैं। गांव में धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। - सुरेश चंद सैनी

गांव कवाल आपस में भाईचारे के नाम से जाना जाता रहा है। 2013 की घटना से आपसी सौहार्द जरूर खराब हुआ था, लेकिन आज फिर से पहले जैसा माहौल गांव में है। कवाल कांड को कोई याद नहीं करता है। - नरेश
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मोहम्मद तैयब। - फोटो : amar ujala
दोहरे हत्याकांड में हो चुकी है सात को उम्रकैद
कवाल कांड में सचिन और गौरव की हत्या में कोर्ट का निर्णय आ चुका है। इस हत्याकांड में गत वर्ष आठ फरवरी 2019 को एडीजे-7 कोर्ट ने सात आरोपियों मुजस्सिम, मुजम्मिल, फुरकान, जहांगीर, नदीम, अफजाल, इकबाल निवासीगण कवाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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कवाल गांव। - फोटो : amar ujala
शाहनवाज हत्याकांड विचाराधीन
एसआईसी ने कवाल कांड की जांच की थी। जांच में एसआईसी ने शाहनवाज हत्याकांड में यह तर्क देकर एफआर लगा दी थी कि सचिन और गौरव ने शाहनवाज की हत्या की थी। उसी समय मौके पर ही इन दोनों की भी हत्या कर दी गई थी। जिस पर शाहनवाज के पिता सलीम की ओर से अदालत में परिवाद दायर किया गया था। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। अब यह मुकदमा जिला जज की कोर्ट में विचाराधीन है। मुकदमे के सभी छह आरोपी रविंद्र सिंह, बिशन, प्रहलाद, तहेंद्र, जितेंद्र और देवेंद्र जमानत पर बाहर है। जिला जज कोर्ट में 20 सितंबर की तारीख गवाही के लिए लगी है।
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