जयंत चौधरी
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मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पहली बार ऐसा मौका आया, जब रालोद, सपा, बसपा और कांग्रेस के साथ मुस्लिम किसान नेताओं ने मंच साझा किया है। सात सितंबर, 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में हुई हिंसा में 65 से ज्यादा बेगुनाहों की मौत ही हुई थी। पचास हजार से ज्यादा लोगों ने गांव छोड़कर शिविरों में शरण ली थी।