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मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पहली बार दिखा साझा मंच, सियासी उलट-फेर की दस्तक दे गई महापंचायत

Sat, 30 Jan 2021 12:29 AM IST
Dimple Sirohi जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

  • जीआईसी मैदान में पहुंचे बड़े मुस्लिम चेहरे
  • जाट-मुस्लिम गणित से भाजपा की बढ़ेगी मु श्किलें
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नरेश टिकैत, टिकैत के खास रहे गुलाम मोहम्मद जौला, जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पर दर्ज मुकदमे और कृषि कानून के विरोध में महापंचायत में उमड़ी भीड़ ने किसान आंदोलन को तो संजीवनी दी ही है, साथ ही सियासी समीकरणों में उलटफेर के संकेत भी दिए हैं।

 
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नरेश टिकैत, जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला
आठ साल पहले जिले में भड़के दंगे के बाद पहली बार भाकियू के बैनर तले विपक्षी दलों ने गिले-शिकवे भूलकर एक साथ मंच साझा किया। विपक्षी पार्टियों के बड़े मुस्लिम चेहरे भी मंच पर थे। भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने भी चौधरी अजित सिंह को हराने को अपनी भूल बताकर भाजपा के खिलाफ लामबंदी की कोशिश की। इन बदलते सियासी समीकरणों ने भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 

 
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जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पहली बार ऐसा मौका आया, जब रालोद, सपा, बसपा और कांग्रेस के साथ मुस्लिम किसान नेताओं ने मंच साझा किया है। सात सितंबर, 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में हुई हिंसा में 65 से ज्यादा बेगुनाहों की मौत ही हुई थी। पचास हजार से ज्यादा लोगों ने गांव छोड़कर शिविरों में शरण ली थी।

 

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kisan mahapanchayat - फोटो : अमर उजाला
आपसी अविश्वास बढ़ता गया और वेस्ट यूपी में राजनीति के नए समीकरण बनते गए। राष्ट्रीय लोकदल का जाट-मुस्लिम वोट गणित ध्वस्त हो गया। ध्रुवीकरण के दम पर भाजपा नई ताकत बन गई। चाहकर भी बीते आठ साल में ऐसा कोई अवसर नहीं नजर आया, जब जाट और मुस्लिम तथा अन्य विपक्षी दलों के नेता एकमंच पर एकजुट हुए हों।

 
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- फोटो : farmers protest up, किसान आंदोलन
ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुए उपद्रव के बाद गाजीपुर बॉर्डर पर योगी सरकार के कड़े तेवर और भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं ने दंगे से बनी खाई भरने का मौका भी दे दिया। महापंचायत में पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम पहुंचे। दंगे की वजहों को लेकर अखिलेश सरकार में अमीर आलम बड़े सवालों के घेरे में थे। फिलहाल वे रालोद में हैं।
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मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत: महापंचायत में बोलते आप राज्यसभा सदस्य संजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
कैराना के विधायक नाहिद हसन और मीरापुर सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हाजी लियाकत ने भी किसान आंदोलन में एकजुट होकर लड़ने की बात रखी। भाकियू सुप्रीमो चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के खास रहे गुलाम मोहम्मद जौला दंगे के उपरांत पूरी तरह मुस्लिम किसान राजनीति तक सिमट गए थे। वे भी भाकियू के मंच पर आए और बोले कि गलतियां दोनों तरफ से हुई हैं। पहली गलती, जाट और मुस्लिमों में हिंसा हुई और दूसरी गलती, रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह को लोकसभा चुनाव में हराना साबित हुई।
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महापंचायत में पहुंचे सैकड़ों किसान - फोटो : अमर उजाला
जौला ने भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को मंच पर एक साथ खड़ा करके उनके के कंधों पर हाथ रखकर कसम दिलाई कि जाति व धर्म से ऊपर उठकर किसान अपने हकों के लिए एकजुट हो जाए। ये बदलते  समीकरण भाजपा को विधानसभा चुनाव में मनमाफिक परिणाम हासिल करने में मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
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