महादेव की भक्ति में डूबे कांवड़िये तमाम मुश्किलों के बावजूद श्रद्धा के पथ पर बढ़े चले जा रहे हैं। दिल्ली का दिव्यांग लाखन सिंह कांवड़ लेकर पहुंचा तो हर कोई हैरान रह गया।
कांवड़ियां रोजाना 25 किलोमीटर का सफर तय करता है। बताया गया कि दिव्यांग लाखन सिंह मां-बाप के निधन के बाद से कांवड़ ला रहे हैं।
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कांवड़ यात्रा।
- फोटो : अमर उजाला
मूलरूप से मथुरा निवासी लाखन सिंह फिलहाल दिल्ली में रह रहा है। दिव्यांग अपने 17 साथियों के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकले हैं।
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लाखन सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि सोमवार को भक्तों की यह टोली मुजफ्फरनगर पहुंची। भले ही वह आम कांवड़ियों की तरह नहीं चल पा रहा हो, लेकिन रोजाना 25 किलोमीटर का सफर तय करता है।
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फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
वह बताते हैं कि सिर्फ पैरों से सीधा खड़ा नहीं हो पाने के कारण थोड़ी दिक्कत हुई है, इसके अलावा वह बेहद आराम से कांवड़ लेकर अपने क्षेत्र के शिवालय की ओर बढ़ रहे है।
दिव्यांग लाखन सिंह का कहना है कि उसने भगवान शिव से कुछ नहीं मांगा। शिव सबको देते हैं और वही देने वाले हैं। किसी मन्नत के लिए वह कांवड़ नहीं लाए हैं। सबको शिव के दरबार में कांवड़ जरूर लानी चाहिए।