उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर की धरती पर नवाचार की भी अच्छी परंपरा रही है। यहां के एक किसान नेता ने ईंधन की कमी को देखते हुए अपनी जिम्मेदारी समझी और गोबर गैस प्लांट के माध्यम से ईंधन की आपूर्ति शुरू की। यह किसानों की सोच और नवाचार का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर का गुड़ पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां का गुड़ देखकर ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। यह सब किसानों की मेहनत और उनके परिश्रम का परिणाम है, जो गन्ने की खेती के माध्यम से खेतों में मिठास पैदा करते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 से 2017 तक के 17 वर्षों में किसानों को कुल 2 लाख 14 हजार करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया था, जबकि उनकी सरकार ने केवल नौ वर्षों में ही 3 लाख 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान किसानों को किया है। यानी आधे समय में करीब 1 लाख 2 हजार करोड़ रुपये अधिक भुगतान किया गया है।