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UP: फार्म साथ भर जमकर दौड़े, एक साथ ट्रेनिंग कर सगे भाई बने दरोगा, पूरे प्रदेश में हो रही इनकी चर्चा

Sun, 17 Mar 2024 06:24 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड - फोटो : अमर उजाला
डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी में आउट परेड के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को 749 दरोगा मिल गए। परेड की सलामी बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ली। इस आयोजन में दो भाइयों से सबसे ज्यादा चर्चा रही। गाजीपुर के गहमर थाना क्षेत्र के बारा गांव निवासी शोएब और उनके छोटे भाई नदीम ने एक साथ पढ़ाई की। भर्ती होने के लिए तैयारी भी साथ की। अब दोनों भाई पास आउट होकर दरोगा भी एक साथ बने हैं। इनके पिता मोहम्मद परवेज खान पश्चिम बंगाल पुलिस में एएसआई के पद पर तैनात हैं।
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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट - फोटो : अमर उजाला
नदीम और शोएब ने गांव से ही पढ़ाई शुरू की थी। इंटरमीडिएट के बाद दोनों लखनऊ में पढ़ाई करने चले गए थे। यहां नदीम और शोएब ने एक साथ फार्म भरा और परीक्षा की तैयारी किए। दोनों भाइयों का चयन एक साथ ही यूपी पुलिस में दरोगा के पद हुआ और संयोग देखिए के ट्रेनिंग के लिए दोनों भाइयों को डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी भेजा गया। शनिवार को दोनों भाई एक साथ पास आउट हुए तो दोनों ने एक दूसरे को मुबारकबाद दी। हालांकि यहां से दोनों का सफर अलग-अलग हो गया है। 
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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट - फोटो : अमर उजाला
नदीम को प्रतापगढ़ और शोएब को बहराइच जनपद में तैनाती दी गई है। नदीम ने बताया कि वह कुल पांच भाई हैं। बड़े भाई शाहबाज का चयन हाल ही में एनटीपीसी में लेबल टू के लिए हुआ है। दूसरे नंबर पर शोएब, तीसरे नंबर पर नदीम हैं। जबकि चौथे नंबर पर निहाल और सबसे छोटा भाई अरसान है। निहाल और अरमान अभी पढ़ाई कर रहे हैं। एक साथ दो बेटों के दरोगा बनने पर मां अबिया, पिता मोहम्मद परवेज खान का पूरा परिवार खुश है।

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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड - फोटो : अमर उजाला

देवरिया के चंदन कुमार बने सर्वांग सर्वोत्तम 

डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी में चंदन कुमार मिश्रा सर्वांग सर्वाेत्तम चुने गए हैं। चंदन कुमार देवरिया जनपद के लार थाना के रौली गांव निवासी हैं। चंदन कुमार मिश्रा यूपी पुलिस के 2019 बैच में सिपाही चुने गए थे। एसआई में चयनित होने पर उन्होंने सिपाही पद से त्यागपत्र दे दिया था। उनकी पत्नी अंकिता भी यूपी पुलिस की कांस्टेबल हैं। एक चार माह का बेटा शिवांश है। चंदन कुमार को लखनऊ जनपद में तैनाती मिली है। चंदन कुमार के पिता रामप्रवेश मिश्र किसान हैं जबकि मां मीरा देवी गृहिणी हैं। बड़े भाई सुरेश कुमार मिश्रा प्राइवेट नौकरी करते हैं। छोटा भाई विशाल का बिहार टीजीटी में चयन हुआ है। 
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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट - फोटो : अमर उजाला

सिपाही रहते की तैयारी इनडोर टॉपर बने सौरभ 

अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान हुई परीक्षा में सर्वोच्च अंक पाकर वाराणसी के गांव जगदीशपुर निवासी प्रशिक्षु दरोगा सौरभ कुमार पटेल इनडोर टॉपर बने। उनके पिता दिनेश कुमार पटेल वेल्डर हैं। मां माधुरी देवी गृहिणी हैं। दो भाई प्रिंस पटेल और गौरव पटेल हैं। सौरभ यूपी पुलिस में पूर्व में सिपाही के पद पर चयनित होकर सेवाएं भी दे चुके हैं। वह अपने परिवार में अकेले सरकारी नौकरी करने वाले हैं। सौरभ कुमार का कहना है कि वह सिपाही के पद पर तैनात थे लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और जिसका उन्हें अच्छा नतीजा मिला। वह आगे भी स्टडी जारी रखेंगे और यूपीपीसीएस की परीक्षा देंगे।

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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड - फोटो : अमर उजाला

होमगार्ड का बेटा बना दरोगा खुशी में झूमा परिवार

आउटडोर टॉपर खुर्शीद आलम फतेहपुर जनपद के बरेठन खुर्द निवासी हैं। उनके पिता रमजान आलम होमगार्ड हैं। इससे पहले खुर्शीद 2017 में सीआरपीएफ में चयनित हुए थे। 2019 में यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर तैनाती मिली। 2021 में दरोगा भर्ती के लिए उन्होंने परीक्षा दी और चयनित हो गए। अब वह आगे भी अपनी मेहनत जारी रखेंगे। खुर्शीद ने बताया कि वह यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। परिवार में मां रहीशन बेगम, बड़े भाई रिजवान और दो बहनें हैं।

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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट - फोटो : अमर उजाला

माता-पिता ने हमेशा प्रेरित किया

समाज में बहुत से लोग सोचते हैं कि पुलिस बहुत सख्त होती है। यह सच है कि अपराधियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करना जरूरी है, लेकिन पुलिस हमेशा पीड़ित के साथ सहयोग की भावना से कार्य करती है। लोगों को इसी बात का अहसास कराऊंगी कि विपरीत परिस्थिति में वह बिना झिझके पुलिस से मदद मांग सकते हैं। मेरे पिता रविंद्र सिंह और मां  मंजू यादव ने मुझे हमेशा कठिन परिश्रम के लिए प्रेरित किया था। छोटी बहन ज्योत्सना पत्रकार है। मेरी उपलब्धि का श्रेय मेरे परिजनों को जाता है। - हर्षिता सिंह, गाजीपुर, सर्वांग सर्वोत्तम कैडेट

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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट - फोटो : अमर उजाला

मेरी मां का सपना पूरा हो गया

मेरी मां रेखा चाहती थीं कि मैं पुलिस विभाग में अपना करियर बनाऊं। सुबह चार बजे वह मुझे जगा देती थीं। इसकी वजह से उनका वर्ष 2019 में निधन हो गया। प्रशिक्षण के दौरान जब भी कोई चीज मुश्किल लगती तो मुझे अपनी मां का सपना याद आ जाता। आज वह होतीं तो सबसे ज्यादा खुशी उन्हें होती। मेरे पिता आनंद सिंह गाजियाबाद में तैनात हैं। - किरन कठायत, चंपावत उत्तराखंड, आउटडोर कैडेट

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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट - फोटो : अमर उजाला

पुलिस विभाग में आना संयोग

मेरे पिता सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हैं, जबकि मम्मी गृहिणी हैं। मेरा सपना शिक्षक बनने का था। मैं सीटेट उत्तीर्ण हूं। पुलिस विभाग में आना संयोग ही कहेंगे। सब इंस्पेक्टर बनने के बाद भी मैं अपने इस सपने को पूरा करना चाहूंगी। खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए काम करना चाहती हूं। जरूरतमंद बच्चों को किताबें उपलब्ध करवाऊंगी, ताकि उनकी पढ़ाई में रुकावट न हो।  - आकांक्षा तिवारी, हरदोई, इनडोर कैडेट

गांव-गांव जाकर करूंगी जागरूक

पासिंग आउट परेड में मैं सेक्शन कमांडर हूं। अब मैं सब इंस्पेक्टर बन गई हूं। मेरा यह सफर बहुत खूबसूरत है। मैं कांस्टेबल के रूप में चंदौली तैनात रह चुकी हूं। हम सभी लड़कियां साइकिल से जातीं थीं। मुझे ग्रामीण क्षेत्र में पोस्टिंग मिली तो गांव-गांव जाकर मैं लोगों को जागरूक करूंगी बेटियों के सपनों को पूरा करने में सहयोगी बनें। - नेहा कुमारी, बलिया

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मुरादाबाद - फोटो : अमर उजाला

2019 में बनीं कांस्टेबल, अब दरोगा

मैंने वर्ष 2019 में कांस्टेबल के रूप में यूपी पुलिस में नौकरी पाई थी, लेकिन मेरे पापा चाहते थे कि मेरे कंधे पर सितारे लगें। इसलिए मैंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अब सब इंस्पेक्टर बनी हूं। भतीजी वर्तिका एक ही रट लगा रही है कि मैं जीत गई हूं। उसको ऐसे खुश होते देखकर मैं अपनी खुशी को बयां नहीं कर सकती हूं। - आरती कुमारी, गाजियाबाद

आज पापा होते तो उन्हें बहुत खुशी होती

मेरी आज की उपलब्धि मेरे पिता को सच्ची श्रद्धांजलि है। दो वर्ष पहले मेरे पापा गजराज रावत का कोरोना संक्रमण की वजह से निधन हो गया था। तैनाती के बाद मैं स्कूलों में जाकर छात्राओं को पुलिस हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दिया करूंगी और विपरीत परिस्थिति में पुलिस से मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करूंगी। - प्रीति रावत, लखनऊ

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मुरादाबाद - फोटो : अमर उजाला

पूरी ईमानदारी से ड्यूटी करूंगी

पापा शिवप्रसाद गुप्ता चाहते थे कि मैं सब इंस्पेक्टर बनूं। मैंने स्वाध्याय करके यह सफलता प्राप्त की है। मेरा यही प्रयास रहेगा कि पूरी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी करूं। कुछ लोगों के मन में पुलिस को लेकर भ्रम रहता है, उसे मैं अपनी कार्यकुशलता से सुधारने की कोशिश करुंगी। अपनी सहजता को बनाए रखने का प्रयास करूंगी। - सोनम कुमारी, मिर्जापुर

भाई के साथ लगाती थी दौड़

मैंने गांव शंकरगंज से हूं। गांव का माहौल था कि लड़कियां दौड़ने के लिए घर से बाहर नहीं जा सकती हैं, मेरे पापा ने सभी की बातों को नजरअंदाज किया। मैंने अपने भाई के साथ दौड़ लगाना शुरू कर दिया था।मुझे उस माहौल से बाहर आने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। - प्रीति विश्वकर्मा, अमेठी

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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट - फोटो : अमर उजाला

पीटीसी से पासआउट हुए 1126 दरोगा

पीटीसी में शनिवार सुबह पासिंग आउट परेड के बाद 1126 दरोगा उत्तर प्रदेश पुलिस का हिस्सा बन गए। एडीजी अमित चंद्रा ने परेड की सलामी ली और शपथ दिलाई। एक साल के प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को साइबर क्राइम, जंगल ट्रेनिंग सर्विलांस, कानून व्यवस्था की विशेषज्ञ पुलिस कर्मियों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। सर्वांग सर्वाेत्तम रहे राय बरेली निवासी आशीष कुमार सिंह को एडीजी ने सम्मानित किया। ललितपुर निवासी अमोल सिंह इनडोर के टॉपर रहे जबकि आजमगढ़ निवासी युद्ध वीर सिंह ने आउटडोर विषयों में प्रथम स्थान हासिल किया। एडीजी अमित चंद्रा द्वारा इन्हें भी शील्ड देकर सम्मानित किया। इस मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार, आरआई परेड दिग्विजय प्रसाद सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। 
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मुरादाबाद में पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट - फोटो : अमर उजाला

संवेदनशील बन पीड़ित को न्याय दिलाएं : एडीजी

पुलिस अकादमी के निदेशक एडीजी राजीव सभरवाल ने प्रशिक्षु दरोगाओं को शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े और जिम्मेदार पुलिस समूह का आप हिस्सा बनने जा रहे हैं। इसके लिए सभी को बधाई। उपनिरीक्षक का पद महत्वपूर्ण होता है। 

कंधे पर कुशल व गुणवत्तापूर्ण विवेचना की जिम्मेदारी ही नहीं होती बल्कि समाज की सुरक्षा का भी भार होता है। अपने दायित्व के निर्वाह में संवेदनशीलता व कठोरता बरतें। समाज के अंतिम व्यक्ति को भयमुक्त वातावरण देना होगा।

इसके बाद ही कंधे पर स्टार व वर्दी की सार्थकता सिद्ध होगी। पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान मिले ज्ञान का लाभ पूरे जीवन काम आएगा। आपको आईपीसी और सीआरपीसी के हर एक बिंदु को बड़े ही सरलता तरीके से समझाया गया है।

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