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संभल हिंसा में खुलासा: पुलिसवालों का कत्ल करा राष्ट्रीय स्तर का विवाद बनाना चाहता था साठा, इन 2 ने की थी हत्या

Mon, 10 Aug 2026 02:01 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, संभल

सार

संभल हिंसा में बड़ा खुलासा हुआ है। दुबई से गिरोह चला रहा शारिक साठा हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों की हत्या करना चाहता था। साठा हिंसा को राष्ट्रीय स्तर का विवाद बनाना चाहता था। न्यायिक जांच रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया। संभल बवाल में विदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।
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Sambhal Violence - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट से 24 नवंबर 2024 को हुए संभल बवाल को लेकर कई अहम खुलासे हुए हैं। दुबई से गिरोह चला रहा शारिक साठा पुलिसकर्मियों की हत्या कराना चाहता था। उसका उद्देश्य विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना था। उसकी मंशा थी कि पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद कर्फ्यू लग जाएगा और विवाद राष्ट्रीय स्तर का बन जाएगा। 

इससे उसके गिरोह का वर्चस्व भी बनेगा। इसका उल्लेख न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में किया गया है। न्यायिक जांच आयोग को एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने जो बयान दर्ज कराए हैं, उसमें बताया है कि शारिक साठा ने अपने गुर्गों को बवाल में भेजकर गोलियां चलवाई थीं।
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संभल हिंसा (फाइल) - फोटो : संवाद
गुर्गों ने पुलिस पूछताछ में यह जानकारी दी थी। उसने गुर्गों को विदेशी हथियार भी उपलब्ध कराए थे। जिन हथियारों से गोलियां चलाई गईं। पुलिस और फोरेंसिक टीम को कारतूस, खोखे मिले थे। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हथियार भी बरामद हो गए थे। 

 
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संभल हिंसा (फाइल) - फोटो : संवाद
जो कारतूस और खोखे मिले थे वह पाकिस्तान में बने हुए थे। एसपी ने ही बताया कि सरायतरीन निवासी बिलाल, कोटगर्वी निवासी नईम, अयान और तुर्तीपुर इल्हा निवासी कैफ की हत्या इस गिरोह ने ही की थी। एक युवक गोली लगने से घायल भी हुआ था।

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संभल हिंसा की तस्वीर (फाइल) - फोटो : संवाद
अफरोज और वारिस ने की थी हत्याएं
बवाल से पहले शारिक साठा ने अपने गुर्गे गुलाम से एप के माध्यम से बातचीत की थी। पत्नी से भी एप के माध्यम से ही बातचीत की गई थी। गुलाम ने ही हथियार मुल्ला अफरोज और वारिस को उपलब्ध कराए थे। इन हथियारों से ही गोलियां चलाई गईं। एसपी ने न्यायिक जांच आयोग को दिए बयान में यह भी बताया कि वह एप का इस्तेमाल बातचीत के लिए इसलिए कर रहा था ताकि उस तक पुलिस न पहुंच सके लेकिन उसके गुर्गे पकड़े गए तो पूरी साजिश का राजफाश हो गया।

 
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हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक सट्टा के घर की कुर्की (फाइल) - फोटो : संवाद
2020 में नकली पासपोर्ट बनवाकर दुबई भागा साठा
हथियार, सोना तस्करी के अलावा आईएसआई के नकली नोट भारत में खपाने के लिए सक्रिय रहे शारिक साठा को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हथियार और नकली नोट के मामले दर्ज किए गए थे। सोना तस्करी उसके भागने के बाद उजागर हुई थी। 

 
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संभल हिंसा का मुख्य आरोपी शरिक साटा (फाइल) - फोटो : संवाद
एसपी ने न्यायिक जांच आयोग को दिए बयान में बताया है कि वह नकली पासपोर्ट के माध्यम से 2020 में दुबई भागा है। वह वाहन चोरी की घटनाएं भी वहीं से कराता है। उसका एक गिरोह है जो पूरे देश में सक्रिय है। वाहन चोरी के 60 मुकदमे दर्ज हैं। इसमें सबसे ज्यादा दिल्ली के थानों में दर्ज हैं। मालूम हो पुलिस शारिक साठा के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की तैयारी कर रही है। ताकि इंटरपोल के माध्यम से उसकी गिरफ्तारी हो सके।
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संभल हिंसा (फाइल) - फोटो : संवाद
आयोग ने जामा मस्जिद कमेटी के सदर और अन्य पदाधिकारियों को माना अफवाह फैलाने का जिम्मेदार
24 नवंबर 2024 का बवाल मस्जिद के वजूखाने के हौद में खोदाई की अफवाह के बाद शुरू हुआ। यह अफवाह फैलाने का आरोप जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली और मस्जिद की कमेटी के अन्य पदाधिकारियों पर है। इसका उल्लेख न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में किया गया है। 

 

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संभल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी (फाइल) - फोटो : संवाद
रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 नवंबर 2024 की सुबह जामा मस्जिद का सर्वे चल रहा था। जामा मस्जिद कमेटी के सदर व अन्य पदाधिकारी आधा घंटे के लिए गायब हुए थे। इस दौरान भीड़ को उकसाया गया। जामा मस्जिद कमेटी के सदर पर आरोप है कि उन्होंने किसी व्यक्ति को कान में कोई बात कहकर बाहर भेजा था। 

 

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संभल पुलिस (फाइल) - फोटो : संवाद
इसके बाद ही धार्मिक नारों की आवाजें तेज हो गई थीं। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बयान में यह दावा किया है कि भीड़ ने ही पुलिस को बताया कि जफर अली ने अंदर से एक व्यक्ति भेजा है। जिसने बताया है कि मस्जिद में वजू का हौद खाली कर खोदाई किए जाने की तैयारी है। इसके बाद ही भीड़ उग्र हो गई और गोलीबारी की गई।

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संभल शहर (फाइल) - फोटो : संवाद
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में मुझपर जो आरोप लगाए गए हैं, वह गलत हैं। मैंने भीड़ को समझाया था, न कि उकसाया। - जफर अली, सदर, जामा मस्जिद कमेटी
 

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संभल में चिपकाए गए पोस्टर (फाइल) - फोटो : संवाद
अलग-अलग दौर की पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिए गए थे सदर
जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली की भूमिका की जांच बवाल के दिन से ही एसआईटी ने करनी शुरू कर दी थी। एसआईटी ने अलग-अलग समय में पूछताछ की थी। जब उनके खिलाफ पुलिस को बवाल की साजिश के सबूत मिले तो 23 मार्च 2025 को एसआईटी ने कोतवाली में पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
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संभल में तैनात सुरक्षाबल (फाइल) - फोटो : संवाद
उन्हें 1 अगस्त 2025 को जमानत मिल गई। अब वह एआईएमआईएम के सदस्य हैं। असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी में एक कार्यक्रम के दौरान मुरादाबाद में सदस्यता ली थी।
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