मुरादाबाद में जन्म प्रमाणपत्र जारी करने वाला ऑनलाइन पोर्टल तकनीकी खराबी के कारण बार-बार ठप हो रहा है। इससे करीब सात हजार नवजातों के जन्म प्रमाणपत्र अटक गए हैं। इससे अभिभावकों को कई सप्ताह से अस्पतालों और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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िला अस्पताल के इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब में मरीजों की भीड
- फोटो : अमर उजाला
मुरादाबाद जिले में जन्म लेने वाले हजारों नवजातों की पहली सरकारी पहचान बनने वाला जन्म प्रमाणपत्र इन दिनों तकनीकी खामियों की भेंट चढ़ गया है। जन्म प्रमाणपत्र जारी करने वाला ऑनलाइन पोर्टल बार-बार ठप होने और लंबित आवेदनों को मंजूरी नहीं मिलने के कारण करीब सात हजार नवजातों के प्रमाणपत्र अटक गए हैं।
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मुरादाबाद में इलाज कराने अस्पताल पहुंचे लोग
- फोटो : अमर उजाला
नतीजा यह है कि सरकारी और निजी अस्पतालों के चक्कर काट रहे अभिभावकों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। सोमवार को भी सिविल लाइंस स्थित महिला अस्पताल में कई अभिभावक जन्म प्रमाणपत्र लेने पहुंचे, लेकिन पोर्टल के काम नहीं करने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
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मुरादाबाद में ठप पड़ा सर्वर
- फोटो : अमर उजाला
अस्पताल के कर्मचारियों ने पोर्टल चलाने की कोशिश की, मगर तकनीकी दिक्कत के कारण कोई समाधान नहीं निकल सका। कई अभिभावकों का कहना है कि वे पिछले कई सप्ताह से अस्पताल और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन बच्चों का प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा है।
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मुरादाबाद में इलाज कराने अस्पताल पहुंचे लोग
- फोटो : संवाद
समस्या सिर्फ सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं है। जिले के निजी अस्पतालों में भी हालात ऐसे ही हैं। रामगंगा विहार स्थित गैलेक्सी नर्सिंग होम की संचालक डॉ. मनीषा जैन के अनुसार 20 मई के बाद पोर्टल पर भेजे गए आवेदनों को अब तक अप्रूवल नहीं मिला है।
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मुरादाबाद में इलाज कराने अस्पताल पहुंचे लोग
- फोटो : संवाद
इससे प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो गई है। हरथला स्थित मुस्कान नर्सिंग होम के संचालक और आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवि गंगल का कहना है कि पोर्टल संबंधी यह समस्या समय-समय पर सामने आती रहती है।
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मुरादाबाद में इलाज कराने अस्पताल पहुंचे लोग
- फोटो : संवाद
चूंकि यह प्रदेश स्तर की तकनीकी व्यवस्था है, इसलिए दिक्कत आने पर पूरे प्रदेश में काम प्रभावित होता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 50 से अधिक ऐसे अस्पताल हैं, जहां नियमित रूप से प्रसव होते हैं। एक माह में हजारों बच्चों का जन्म होता है।
मुरादाबाद में इलाज कराने अस्पताल पहुंचे लोग
- फोटो : संवाद
पोर्टल की खराबी के चलते मई के अंतिम सप्ताह से अब तक करीब सात हजार नवजातों के जन्म प्रमाणपत्र जारी नहीं हो सके हैं। इससे अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है। महिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रनवीर सिंह का कहना है कि समस्या स्थानीय स्तर की नहीं है। पोर्टल में तकनीकी दिक्कत आने पर उसका समाधान प्रदेश स्तर से किया जाता है। हालांकि बीच-बीच में पोर्टल काम करता है।