सोना तस्करी केस में एक चश्मदीद नावेद ने आपबीती बताई है। उसका कहना है कि घर लाैटते समय उनका मुरादाबाद में अपहरण हो गया। बोलेरो गाड़ी से आए दो लोगों ने खुद को एसओजी बताकर उनकी गाड़ी रोकी, मोबाइल छीने और नकाब पहनाकर हाथ बांध दिए। एक व्यक्ति ने खुद को डॉक्टर बताकर पेट चीरने की बात कही। इससे वह डर गए थे।
सऊदी अरब से लौटे रामपुर जिले के टांडा के दो युवक मो. नावेद और जाहिद अली तीन दिन तक लापता रहे। बदमाशों ने शुक्रवार को रास्ते में उन्हें अगवा कर लिया। फिर पुलिस ने सोना तस्करी मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। सोमवार शाम को जब दोनों युवक घर पहुंचे तो परिवार और मोहल्ले में खुशी की लहर दौड़ गई।
तीन दिन तक चिंता में डूबे परिजनों ने बताया कि शुक्रवार रात से सोमवार शाम तक घरों में चूल्हा तक नहीं जला था। अब राहत मिली। नावेद और जाहिद दिल्ली से टांडा लौट रहे थे। रास्ते में इत्तेफाक से दोनों एक गाड़ी में बैठ गए, जिसमें चार अन्य युवक भी सवार हुए जो बाद में सोना तस्करी के आरोपी निकले।
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मुरादाबाद में सोना तस्करी का खुलासा
- फोटो : संवाद
सोना तस्करों के साथ इन दोनों का भी हुआ अपहरण
बदमाशों ने सोना तस्करों के साथ इन दोनों का भी अपहरण कर लिया था। पुलिस ने सभी को बदमाशों के चंगुल छुड़ाया, लेकिन छुड़ाए जाने के बाद भी नावेद और जाहिद को तत्काल रिहा नहीं किया गया। पुलिस ने उन्हें सोना तस्करी की जांच में शामिल मानते हुए हिरासत में लेकर पूछताछ की। यह सिलसिला सोमवार शाम तक चला, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
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मुरादाबाद में सोना तस्करी का खुलासा
- फोटो : संवाद
भूखे-प्यासे परिजन काटते रहे थानों के चक्कर
नावेद के पिता नवाज अली और जाहिद के भाई सैयद नासिर मियां मुरादाबाद के मूंढापांडे थाने के चक्कर लगाते रहे। नवाज अली ने बताया कि शुक्रवार देर रात किसी से पता चला कि बेटे को लुटेरे उठा ले गए हैं। उसके बाद से खाना-पीना छूट गया। जाहिद के भाई बोले कि बस यही सुनने को मिलता रहा कि पूछताछ चल रही है।
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मुरादाबाद में सोना तस्करी का खुलासा
- फोटो : संवाद
घर लौटे तो दौड़ पड़े मिलने वाले
सोमवार शाम जब दोनों युवक घर पहुंचे तो रिश्तेदारों और पड़ोसियों का तांता लग गया। घरों में रौनक लौट आई। महिलाओं ने बताया कि तीन दिन तक घर में न किसी ने खाना बनाया, न टीवी चला। नावेद ने बताया कि लुटेरे उनसे 1700 रियाल भी छीन ले गए और पेट चीरने की धमकी दी गई। जाहिद बोले, हमें नहीं पता था कि किस गुनाह की सजा मिल रही है।
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मुरादाबाद पुलिस की हिरासत में सोना तस्करी के आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
मो. नावेद ने बयां की पूरी कहानी
मैं 23 मई को सऊदी अरब से दिल्ली लौटा। पहले से ही टांडा निवासी जुल्फेकार की कार बुक कर रखी थी। एयरपोर्ट पर गाड़ी में बैठते ही जाहिद अली मिल गए, जो संयोग से उसी गाड़ी से टांडा लौट रहे थे। रास्ते में ड्राइवर के मालिक का फोन आया कि चार सवारियां मुंबई से आई हैं, उन्हें भी साथ लेना है। हमने विरोध किया, तो कहा कि गाड़ी छोड़ दो। मजबूरी में चारों को साथ बैठा लिया। इसके बाद बदमाशों द्वारा अपहरण, सोना तस्करी के आरोप, फिर पुलिस की हिरासत ने सबकुछ बदल दिया। घर पहुंचने के बाद टांडा निवासी मो. नावेद ने अगवा होने से लेकर बदमाशों की कैद और फिर पुलिस हिरासत तक की पूरी कहानी बयां की।
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पुलिस चाैकी टांडा
- फोटो : संवाद
'हमारे मुंह पर नकाब चढ़ा दिए और हाथ प्लास्टिक की टाई से बांध दिए'
नावेद ने कहा, दिल्ली से लौटते समय दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर मुरादाबाद में पुराने टोल पर पहुंचे तो एक बोलेरो गाड़ी आई। उसमें दो लोग थे। एक पुलिस जैसी वर्दी में और दूसरा सिविल ड्रेस में था। उन्होंने सायरन बजाकर हमारी गाड़ी रोकी और कहा कि एसओजी से हैं, पूछताछ करनी है। फिर उन्होंने सबके मोबाइल फोन ले लिए हमारे मुंह पर नकाब चढ़ा दिए और हाथ प्लास्टिक की टाई से बांध दिए।
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सोना तस्करी
- फोटो : संवाद
मुझे तब भी यकीन नहीं हुआ कि हम बदमाशों के चंगुल में हैं, लेकिन जब उन्होंने कहा कि ज्यादा बोले तो एनकाउंटर कर देंगे। तब समझ आ गया कि कुछ गड़बड़ है। रास्ते में बदमाश ने मोबाइल पर किसी से कहा कि यह छह लोग हैं, जबकि तुमने चार बताए थे। यह सुनते ही पसीने छूट गए।
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आरोपियों के पेट से निकाले गए सोने के कैप्सूल
- फोटो : संवाद
जंगल में पहले से मौजूद एक शख्स ने खुद को डॉक्टर बताया और कहा कि पेट चीरकर देखना पड़ेगा कि कहीं सोना निगल कर तो नहीं लाए। तब लगा कि अब जीवन खत्म हो जाएगा। शुक्र है कि उसी वक्त पुलिस पहुंच गई और हमें छुड़ा लिया। अब तक मेरा मोबाइल, 1700 रियाल और एक बैग पुलिस के पास है। बीते चार दिनों ने मेरी जिंदगी बदल दी है।
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मुरादाबाद में मुठभेड़ के दाैरान पकड़े आरोपी
- फोटो : संवाद
जाहिद ने कहा, लगा कि अब जान गई
पुलिस की हिरासत से छूटकर घर पहुंचे बदमाशों द्वारा अगवा हुए दूसरे युवक जाहिद अली ने भी आपबीती बताई। जाहिद ने कहा, मैं सऊदी अरब में काम करता हूं और 23 मई को लौटा था। मुझे मो. नावेद की बुक की हुई गाड़ी मिल गई तो हम दोनों टांडा लौटने लगे। कुछ दूर चलने पर चार और सवारियों को साथ लेने की बात हुई। हमें शक तो हुआ, लेकिन ड्राइवर के मालिक के दबाव में साथ ले लिया।
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मुरादाबाद में मुठभेड़ के दाैरान पकड़े आरोपी
- फोटो : संवाद
मुरादाबाद के पास जब हम लोगों को बदमाशों ने एसओजी बताकर दूसरी गाड़ी में बैठाया और मोबाइल लेकर मुंह पर नकाब चढ़ा दिया और हाथ बांध दिए। तब बहुत डर लगा। फिर जंगल में ले जाकर डॉक्टर ने कहा कि पेट चीरना पड़ेगा। उस वक्त मेरे होश उड़ गए। मैंने चुपचाप कलमा पढ़ना शुरू कर दिया और मन ही मन बच्चों को याद करने लगा।
मुरादाबाद में मुठभेड़ में घायल से पूछताछ करते एसपी सिटी
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थोड़ी देर बाद अचानक पुलिस पहुंच गई और हमें बचा लिया। इसके बाद हमें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। तीन दिन तक पुलिस ने लगातार सवाल किए। अब जब घर लौटा हूं तो लगता है जैसे नया जीवन मिला हो, लेकिन अभी तक मेरा मोबाइल नहीं मिला है। मैं मानसिक रूप से टूट चुका हूं।