फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धनतेरस पर बधाई हो: दीपावली पर 53 परिवारों के घर आईं लक्ष्मी, खुशी का नहीं रहा ठिकाना..पटाके फोड़े-मिठाई बांटी

Sat, 11 Nov 2023 05:19 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
विज्ञापन
1 of 6
मुरादाबाद अस्पताल में जच्चा-बच्चा - फोटो : अमर उजाला

धनतेरस के दिन शहर के 53 परिवारों में बिटिया रूपी लक्ष्मी ने जन्म लिया है। इनमें से 21 ने डॉक्टर से डिलीवरी के लिए 10 नवंबर की तारीख ली थी। डॉक्टरों के मुताबिक डिलीवरी दो से तीन दिन बाद या पहले भी हो सकती थी, लेकिन इन्होंने बेटी को लक्ष्मी के रूप में मानने के लिए धनतेरस का दिन चुना। हालांकि कई और भी हैं, जिन्होंने यह तारीख चुनी, लेकिन ईश्वर ने कुछ को ही बेटी के रूप में उपहार दिया है। जिला महिला अस्पताल में नौ नवंबर की रात 12 बजे से 10 नवंबर की रात 8 बजे तक पांच बच्चियों ने जन्म लिया।

विज्ञापन

2 of 6
मुरादाबाद अस्पताल में जच्चा-बच्चा - फोटो : अमर उजाला


वहीं कॉसमॉस, सिद्ध, एपेक्स, समेत जिले के अन्य अस्पतालों में कुल 48 महिलाओं ने बेटी को जन्म दिया है। इनके परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है। इनमें से किसी ने अस्पताल परिसर में मिठाई बांटी तो किसी ने मौके पर ही बेटी का नामकरण कर दिया। बेटी को किसी ने ऐश्वर्या, वैभवी, श्री, समृद्धि तो किसी ने लक्ष्मी नाम दिया है। महिला अस्पताल में पहली किलकारी दिन के नौ नवंबर को रात 12:40 बजे आई। जैसे ही परिजनों को नर्सिंग स्टाफ ने सूचना दी कि बेटी हुई है, सभी के चेहरे चहक उठे।

विज्ञापन

3 of 6
मुरादाबाद में दिवाली के मौके पर सजे बाजार - फोटो : अमर उजाला

जन्म के बाद मां राशिका बच्ची को देखते ही उसे गोद में लेकर चूमने लगी। बच्ची के साथ समय बिताने के बाद सुबह होते ही उसके पिता रवि तुरंत मिठाई लेने निकल पड़े। धीरे-धीरे अस्पताल में उसका पूरा परिवार भर गया। परिजनों ने बताया कि राशिका के पति ने डिलीवरी से पहले ही बेटी की इच्छा जाहिर की थी। ईश्वर ने उनकी इच्छा पूरी कर दी। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. निर्मला पाठक ने बताया कि शुक्रवार को पूरे दिन अस्पताल में किलकारियां गूंजती रही। ऑपरेशन में भी पहला बच्चा बेटी ही हुई।

4 of 6
दिवाली के मौके पर खरीदारी करते लोग - फोटो : अमर उजाला

इकरा नूर बोलीं बेटी ही धन है

भावनाएं किसी धर्म की मोहताज नहीं होतीं। यूं तो धनतेरस हिंदुओं का त्योहार माना जाता है, लेकिन जिला अस्पताल में बेटी को जन्म देने वाली इकरा नूर ने बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि धर्म कोई भी हो, लेकिन असली धन तो बेटी ही है। उन्होंने कहा कि यदि बेटी शिक्षित हो तो एक पीढ़ी के शिक्षित होने की गारंटी हो जाती है। उन्होंने अभी से बिटिया के भविष्य के सपने गढ़ लिए हैं। उसे पढ़ा लिखाकर डॉक्टर बनाने की इच्छा व्यक्त की है।

विज्ञापन

5 of 6
मुरादाबाद में दिवाली के मौके पर सजे बाजार - फोटो : अमर उजाला

नवरात्र में भी लोगों ने डिलीवरी के लिए ली भी तारीख

सिर्फ धनतेरस की ही नहीं, बल्कि नवरात्र में भी लोगों ने डिलीवरी के लिए डॉक्टरों से तारीख ली थी। चूंकि नवरात्र में नौ दिन होते हैं इसलिए डिलीवरी में कोई परेशानी भी नहीं हुई लेकिन कई बार लोगों की इच्छा के मुताबिक तय तारीख पर डिलीवरी नहीं होती। यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सीएमएस ने बताया कि अब ज्यादातर लोगों में बेटी व बेटे को लेकर सोच बदल गई है। बेटियों को खेलों में पदक लाते देख, अस्पतालों में मरीजों का इलाज करते देखकर समाज में चेतना आई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
मुरादाबाद बाजार में दिवाली की खरीदारी - फोटो : अमर उजाला

आजकल लोग फैमिली प्लानिंग के समय बच्चों के जन्म का महीना तक प्लान कर लेते हैं। धनतेरस के अलावा लोग नए साल पर, दिवाली पर या अन्य किसी खास दिन पर डिलीवरी के लिए डॉक्टर से परामर्श लेते हैं। कई केसों में तय तारीख पर डिलीवरी हो भी जाती है। इस बार धनतेरस पर शहर में 50 से ज्यादा बेटियों ने जन्म लिया है। - डॉ. मनीषा जैन, अध्यक्ष मुरादाबाद गाइनी सोसायटी

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें