अभिलेखों में 400 वर्ग मीटर एरिया में बावड़ी तालाब के रूप में दर्ज है। बिलारी के राजा के परिवार के समय यहां बावड़ी बनी थी। इसमें तीन मंजिल भवन के संकेत भी मिले हैं। जानें संभल में अब तक क्या-क्या मिला?
संभल के चंदौसी के मोहल्ला लक्ष्मण गंज में मिली बावड़ी का अस्तित्व में लाने के लिए दूसरे दिन रविवार को भी शाम छह बजे तक खोदाई कार्य किया गया। दो जेसीबी और मजदूरों को कार्य में लगाया लगाया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे बावड़ी आकार लेने लगी। जिसमें चार गलियारेनुमा कमरे बताए जा रहे हैं। इस दौरान लोगों की भीड़ लगी रही। वहीं पुलिस रस्सी बांध कर लोगों को बावड़ी के करीब आने से रोकती रही।
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संभल में बंद मंदिर खोला गया
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सनातन सेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख कौशल किशोर वंदेमातरम् द्वारा शनिवार को तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम राजेंद्र पैंसिया को एक प्रार्थनापत्र देकर मोहल्ला लक्ष्मण गंज में 17 दिसंबर को मिले खंडहरनुमा बांकेबिहारी मंदिर के पास आबादी के बीच खाली प्लाट में सन् 1857 की बनी बावड़ी होने का दावा किया गया था।
डीएम के आदेश पर तहसील और पालिका की टीम भेज कर शनिवार की शाम चार बजे दो जेसीबी से खोदाई शुरू की गई तो एक घंटे बाद ही दीवारें नजर आने पर बावड़ी का अस्तित्व सामने आने लगा। हालांकि शनिवार को शाम छह बजे अंधेरा होने पर खोदाई रोक दी गई।
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संभल में कूएं की खोदाई
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रविवार को सुबह 10 बजे से फिर से खोदाई शुरू हुई। प्रशासन ने बताया कि दोपहर तीन बजे तक बावड़ी की पहली मंजिल के चार कमरे दिखाई देने लगे। कमरों से जुड़ा लंबा गलियारा है, जिसे शुरू में सुरंग माना जा रहा था। इसके बाद शाम छह बजे तक बावड़ी के ऊपर की मिट्टी हटाने का काम किया गया। एसडीएम नीतू रानी ने बताया कि अभी चार कमरे दिखाई दिए हैं। सोमवार को खोदाई का कार्य जारी रहेगा।
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संभल में एएसआई सर्वे
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बावड़ी से जुड़े तीन मंजिला भवन के भी संकेत
डीएम बताया कि अभिलेखों में 400 वर्ग मीटर एरिया में बावड़ी तालाब के रूप में दर्ज है। बिलारी के राजा के परिवार के समय यहां बावड़ी बनी थी। इसमें तीन मंजिल भवन के संकेत भी मिले हैं। दो मंजिल संगमरमर से बनी हैं। एक मंजिल ईंटों से बनी है। इसमें कुआं भी है और चार कक्ष बने हैं। ये बावड़ी 150 साल पुरानी बताई जा रही है। डीएम ने बताया कि जरूरत पड़ी तो पुरातत्व निदेशालय की टीम को पत्र भेजा जाएगा। डीएम ने बताया कि बावड़ी के कुछ समय पूर्व मिले मंदिर का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। जिससे लोग वहां पूजा कर सकें। इसके लिए अतिक्रमण भी हटाया जाएगा।
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खग्गू सराय में मिले शिव मंदिर में पूजा करते लोग
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सबसे पहले खग्गू सराय में मिला बंद मंदिर
संभल के मुस्लिम बाहुल्य इलाका खग्गू सराय में 46 वर्षों से बंद ऐतिहासिक शिव मंदिर मिला। इसके बाद वहां पूजा शुरू हो गई। मंदिर मिलने के बाद पूरे इलाके की सफाई करवाई गई थी। प्रशासन को यह मंदिर अतिक्रमण हटाओ अभियान के दाैरान मिला।
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संभल के शिव मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु
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खंडित मूर्तियां मिलीं
खग्गू सराय इलाके में शिव मंदिर के परिसर में बने प्राचीन कुएं की खुदाई के दौरान भगवान शिव, गणेश, माता पार्वती और कार्तिकेय की खंडित मूर्तियां मिली। प्रशासन ने मूर्तियों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। 1978 के दंगों के बाद खग्गू सराय में रहने वाले 40 रस्तोगी परिवार अपने मकान बेचकर पलायन कर गए थे। इसके बाद मंदिर बंद हो गया था।
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संभल में बंद मंदिर के कपाट खुलने के बाद पूजा अर्चना शुरू
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चार प्राचीन कुएं मिले
संभल में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दाैरान चार प्राचीन कुएं भी मिले। लोगों ने अतिक्रमण कर इनको पाट दिया था। पालिका ने कुओं से अतिक्रमण हटवाकर संवारने का काम शुरू कर दिया है। ताकि कुओं को पुराने स्वरूप में लौटाया जा सके। नगर पालिका के ईओ मणिभूषण तिवारी ने बताया कि एजेंटी तिराहा, खग्गू सराय के अलावा मोहल्ला कोर्टगर्वी और खग्गू सराय की मस्जिद में बंद कुएं मिले हैं। अभी तक खग्गू सराय, आलम सराय, कोटगर्वी, एजेंटी तिराहा, चमन सराय में मिले कुएं की खोदाई और सफाई कराई जा रही है
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पूजा अर्चना शुरू
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19 कूप और पांच तीर्थों का सर्वे
संभल और उसके आसपास बने 19 कूप और पांच तीर्थों का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम सर्वे कर चुकी है। टीम ने खग्गू सराय में स्थित प्राचीन शिव मंदिर और इसके परिसर में खोले गए कुएं की कार्बन डेटिंग के लिए नमूने लिए हैं। इसके अलावा शहर के अलग अलग स्थानों पर स्थित 19 कूप का भी सर्वे किया।
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संभल में एक और मंदिर मिला
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चंदाैसी में मिला बांके बिहारी मंदिर
1992 में संभल में हुए दंगे के बाद से बंद मोहल्ला कछवायन स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर को 32 साल के बाद प्रशासन ने खुलवा दिया। मंदिर की साफ सफाई के बाद लोगों ने पूजा-अर्चना शुरू कर दी है। मंदिर की सुरक्षा के लिए फोर्स तैनात की गई है। नगर निवासी सुमित कुमार सैनी ने बताया कि 1992 से पहले मोहल्ला कछवायन में मिश्रित आबादी थी। यहां पर सैनी समाज के 200 परिवार रहते थे। लेकिन 1992 में दंगा भड़का तो मोहल्ला मुस्लिम बहुल होने के चलते सैनी समाज के लोग काफी डर गए थे।
चंदौसी के लक्ष्मणगंज में बांकेबिहारी मंदिर के बाद 150 वर्ष पुरानी बावड़ी मिली है। खोदाई में बावड़ी में चार कमरे निकले हैं और सुरंग जैसा भी रास्ता है। अधिकारियों का कहना है कि बावड़ी की खुदाई जारी रहेगी।