सपा नेता आजम खां सवाल का सीधा जवाब न देकर कई सवाल खड़े कर गए। बसपा में शामिल होने की अटकलों को खारिज नहीं किया। कुछ न कह कर उन्होंने सपा के खेमे में हलचल बढ़ा दी। इशारे में दिए गए जवाब ने दूसरी पार्टियों के लिए दरवाजा भी आधा खुला छोड़ दिया है।
सीतापुर जेल से मंगलवार को रिहा हुए सपा नेता आजम खां ने नए सियासी ठिकाने की अटकलों पर विराम लगाने के बजाय इसे और हवा दे दी। रिहाई के बाद मीडिया से उनकी पहली प्रतिक्रिया सतही तौर पर आभार व्यक्त करने जैसी लगी लेकिन उन्होंने सवालों के सीधे जवाब न देकर सियासी गलियारों में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
बसपा में शामिल होने की अटकलों पर आजम खां ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने न इन्कार किया और न ही पुष्टि। यह रवैया अपने आप में बड़ा संदेश था। अगर वह चाहते तो इन सवालों को खारिज करते हुए साफ कर सकते थे लेकिन कुछ न कह कर उन्होंने सपा के खेमे में हलचल बढ़ा दी। इशारे में दिए गए जवाब ने दूसरी पार्टियों के लिए दरवाजा भी आधा खुला छोड़ दिया है।
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सीतापुर जेल से रिहाई के बाद सपा नेता आजम खां का स्वागत करते नेता
- फोटो : पीटीआई
आजम खां ने अपने बयान में आगे कहा कि वह पहले अपना इलाज कराएंगे। उसके बाद आगे की रणनीति तय करेंगे। साफ है कि वह अपने राजनीतिक भविष्य पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उनकी करीबी एक सांसद ने भी आजम के जेल से बाहर निकलने से पहले दिए गए बयान में कहा कि आजम खां बड़े नेता हैं। हर दल उन्हें चाहेगा। जेल से बाहर आने के बाद रणनीति बनेगी। यह बयान भी चर्चाओं को हवा देने के लिए काफी है।
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सीतापुर जेल से रिहाई के बाद रामपुर पहुंचकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते सपा नेता आजम खां
- फोटो : अमर उजाला
आजम खां यूपी में बड़े मुस्लिम नेता हैं। खासतौर पर पश्चिमी यूपी में उनकी खास पकड़ भी है। इसके अलावा प्रदेश भर के मुसलमानों में उनके लिए सहानुभूति भी है।
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सीतापुर जेल से रिहाई के बाद रामपुर में अपने घर के बाहर समर्थकों के बीच सपा नेता आजम खां और उनके बेटे
- फोटो : अमर उजाला
दूसरी ओर अक्तूबर में बसपा की प्रस्तावित बड़ी रैली की तैयारियां भी तेज हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो आजम खां उस मंच से बसपा में शामिल हो सकते हैं। आजम खां की पत्नी तंजीन फात्मा की बसपा सुप्रीमो से मुलाकात की चर्चाओं ने ऐसी बातों को और मजबूती दी है।
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सीतापुर जेल से रिहाई के बाद मंगलवार को रामपुर पहुंचे आजम ख्रां का उनके घर के बाहर स्वागत करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
रिहाई के बाद आजम खां ही इन सभी चर्चाओं को खत्म कर सकते थे लेकिन अभी ऐसा देखने को नहीं मिला। आजम खां ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जेल में रहते हुए उन्हें किसी से मुलाकात की अनुमति नहीं मिली और न ही फोन कॉल का कोई हक दिया गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह पांच साल से पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कटे हुए हैं।
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सीतापुर जेल से रिहाई के बाद कार में मीडिया से बात करते सपा नेता आजम खां
- फोटो : पीटीआई
बोले, वही लोग बताएंगे जो अटकलें लगा रहे हैं
बसपा में शामिल होने की चर्चाओं पर आजम ने न तो साफ इनकार किया और न ही हां कहा। उन्होंने तटस्थ रवैया अपनाते हुए कहा कि यह तो वही लोग बताएंगे जो ऐसी अटकलें लगा रहे हैं। रिहाई के बाद उनके हर बयान में उनका वही पुराना अंदाज नजर आया जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर किसी भी सवाल का जवाब न देकर इशारों से ही अपनी बात रखी।
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सीतापुर जेल से रिहाई के बाद शाहजहांपुर हाइवे पर समर्थकों व कार्यकर्ताओं से हाथ मिलाते आजम खां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा... पुराने रंग में नजर आए आजम खां
आजम खां मीडिया और समर्थकों के सामने अपने पुराने चिर-परिचित अंदाज में नजर आए। तकरीबन 23 महीने तक जेल की सलाखों के पीछे रहने के बावजूद उनके अंदाज में कोई बदलाव नजर नहीं आया। जेल से बाहर आते ही आजम खां हमेशा की तरह सफेद कुर्ता-पायजामा, सदरी और काले चश्मे में दिखाई दिए। उनका यह अंदाज उनकी पुरानी राजनीतिक छवि की याद दिला गया। मीडिया ने जब उनसे सवाल किया कि जेल में रहते हुए उन्होंने क्या महसूस किया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए शायराना अंदाज में जवाब दिया। पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है। आजम खां पहले भी शायरी के माध्यम से ही अपने विचार रखते रहे हैं। इस जवाब ने एक बार फिर उनके पुराने रंग की झलक दिखलाई।
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सपा सांसद रुचिवीरा
- फोटो : अमर उजाला
सांसद एवं पूर्व सांसद ने कहा
आजाद भारत में जितना जुल्म किसी व्यक्ति पर हो सकता था वह आजम खां के साथ हुआ है। कोर्ट ने उन्हें न्याय दिया है। न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है कि आजम खां सभी मामलों में बरी होंगे। सभी मुकदमे फर्जी हैं। आजम खां ने सपा को खून-पसीने से सींचा है और फाउंडर रहे हैं। वह बड़े सियासी रहनुमा हैं जिनके स्वागत के लिए हर दल तैयार हैं लेकिन वह सपा में ही रहकर पार्टी को मजबूत करेंगे। किसी और दल में जाने की बात भाजपा की सियासी साजिश भर है। आजम खां की रिहाई के लिए सभी कार्यकर्ताओं को मुबारकबादी देती हूं। रुचिवीरा, सांसद
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पूर्व सांसद एसटी हसन
- फोटो : संवाद
आजम खां पार्टी के कद्दावर नेता हैं और उनकी रिहाई से पूरी पार्टी खुश है। उनपर दर्ज किए गए सभी मुकदमे झूठे हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि उन्हें सभी मामलों में ब-इज्जत बरी किया जाएगा। उनके किसी और पार्टी में जाने की जो चर्चाएं हैं वह पूरी तरह बेबुनियाद है। मैं उनकी बड़ी इज्जत करता हूं अगर उन्होंने बुलाया तो मैं उन्हें मुबारकबाद देने के लिए जाऊंगा। डॉ. एसटी हसन, पूर्व सांसद
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सीतापुर जेल से रिहाई के बाद रामपुर पहुंचकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते सपा नेता आजम खां
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अखिलेश की नहीं है कोई भूमिका
आजम खां की रिहाई को लेकर एआईएमआईएम ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। महानगर अध्यक्ष वकी रशीद ने कहा कि आजम खां की रिहाई इंसाफ की जीत है। लेकिन इस रिहाई में अखिलेश यादव की कोई भूमिका नहीं है। अखिलेश यादव और भाजपा पूरी कोशिश करेंगे कि आजम खां दोबारा जेल भेजे जाएं क्योंकि अखिलेश यादव नहीं चाहते कि पार्टी में कोई उनसे बराबरी से बात करे।
कार से समर्थकों का अभिवादन करते आजम खां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आजम की रिहाई से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला
प्रदेश के विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं जिले के प्रभारी मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि आजम खां की जेल से रिहाई होने से प्रदेश की राजनीति या विधानसभा चुनाव पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। सभी लोगों ने देखा कि 2017 में चुनाव के दौरान वह जेल में नहीं थे लेकिन सपा चुनाव हार गई।