अंकित मौत पर गुस्साए लोगों ने रोड जाम कर दिया।
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अंकित के पिता कृष्णपाल के साथ तीनों भाइयों ने पशु पाल रखे हैं और कुट्टी काटने की मशीन लगा रखी है, जिसमें घास काटकर अपने जीवन का पालन कर रहे हैं। वह केवल रामपुरी की रामलीला में ही मंचन करता था, लेकिन इस बार जब कच्ची सड़क की रामलीला वालों को ताड़का के लिए कोई पात्र नहीं मिला, तो उसने यहां पर ताड़का का रोल किया। अगले दिन रामपुरी की रामलीला में उसका रोल था।
रविवार की रात ताड़का का रोल करते हुए अचानक आग लग जाने से वह स्टेज पर ही तड़पने लगा। आग बुझाने के लिए रामलीला के आसपास न तो रेत था और न ही पानी। कंबल भी नहीं मिला और कुछ ही देर में वह 80 प्रतिशत जल गया। जिला चिकित्सालय के बाद मेरठ और इसके बाद दिल्ली सफदरजंग में उसका इलाज चला। सात दिन तक वह जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा और रविवार की सुबह उसने आखिरी सांस ली।