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ये हैं सरकारी स्कूल के नौनिहाल: कोई बना रहा रोबोट तो कोई बुलेट ट्रेन कांसेप्ट पर कर रहा काम, तस्वीरें हैं खास

Thu, 04 Aug 2022 08:10 PM IST
कपिल kapil सागर कश्यप, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
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नई तकनीक सीख रहे बच्चे। - फोटो : amar ujala
कक्षा आठ का प्रशांत पायथन लैंग्वेज में कोडिंग और कक्षा सात की वंशिका को वायरलैस चार्जिंग कांसेप्ट की जानकारी है। यह वह तकनीक है जिससे आप अपने आईफोन को बिना वायर ही चार्ज कर लेते हैं। हम किसी कान्वेंट या सीबीएसई स्कूल के छात्रों की बात नहीं कर रहे हैं। यह सब उच्च प्राथमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं को सिखाया जा रहा है।

सीडीओ शशांक चौधरी के प्रोजेक्ट के तहत मोहिउद्दीनपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में आधुनिक लैब ‘आधारशिला’ तैयार की है। लैब में आधुनिक टेक्नालॉजी से लेकर सौरमंडल और अंतरिक्ष तक का ज्ञान छात्र-छात्राएं जान रहे हैं। ‘लर्निंग बाय डूइंग’ यानि करके सीखने की पद्धति से प्रेरित होकर विद्यालय में लैब को तैयार किया गया है। आधारशिला के अंदर छात्र कोडिंग से लेकर आटिफिशियल इंटेलिजेंसी, रोबोटिक से लेकर ड्रोन टेक्नोलॉजी, न्यूटन के नियमों से लेकर बुलेट ट्रेन कांसेप्ट और ग्रहों के घूमने से लेकर टेलिस्कोप से ब्रह्मांड की सैर कर रहे हैं। ग्राम प्रधान विजय नामदेव ने बताया कि इसको संचालित करने के लिए स्कूल के शिक्षकों को ट्रांसफोर्मेशन ट्रेनिंग के तहत मास्टर ट्रेनर बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है।

देखें वीडियो: https://youtu.be/DmJjzhpkZKg
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सरकारी स्कूल के बच्चे। - फोटो : amar ujala
पीयूष ने बनाया रोबोट
कक्षा आठ के छात्र पीयूष ने मात्र सात दिनों में ऑब्स्टेकल अवाइडर रोबोट तैयार किया है। यह रोबोट कार्डबोर्ड से बनी एक कार है। इसमें उन्होंने सेंसर रोबोट और माइक्रो कंट्रोलर लगाया है। आर्डिनो बोर्ड के साथ प्रोग्रामिंग कर इस कार को इस तरह बनाया गया है कि रास्ते में कोई बाधा आते ही यह खुद रास्ता बदल लेती है।
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नई तकनीक सीखते बच्चे। - फोटो : amar ujala
वायरलैस चार्जिंग कांसेप्ट की जानकारी रखती हैं वंशिका
कक्षा छह की वंशिका वायरलैस चार्जिंग कांसेप्ट की जानकारी रखती हैं। वंशिका ने एक मॉडल के जरिए बताया कि किस तरह इलेक्ट्रो मैग्नेटिक इंडक्शन यानि ईएमआई कांसेप्ट कार्य करता है। इस मॉडल के जरिए बच्चों को इलेक्ट्रिसिटी और मैग्नेटिक कांसेप्ट की जानकारी दी गई है।

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सरकारी स्कूल के बच्चे। - फोटो : amar ujala
कक्षा सात के प्रशांत को अंतरिक्ष और सौरमंडल में काफी दिलचस्पी है। लैब में मौजूद टेलिस्कोप से उन्होंने सौरमंडल के कई ग्रहों के बारे में जाना है। प्रशांत ने बताया कि किस तरह से अब एक ही रॉकेट के जरिए सेटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजकर उसको वापस धरती पर लाया जाता है।
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नई तकनीक सीखते बच्चे। - फोटो : amar ujala
विद्यालय में चार सौ पार है छात्रों की संख्या
उच्च प्राथमिक विद्यालय में चार सौ से भी अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। प्रधानाध्यापिका मधुबाला ने बताया कि विद्यालय में आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों के बालक पढ़ते हैं। वहीं, लैब बनने के बाद से अभिभावक भी छात्रों को यहां भेजने में रुचि लेने लगे हैं। यही कारण है कि यहां छात्रों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
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छात्रा। - फोटो : amar ujala
मुख्य सचिव ने भी प्रोजेक्ट को सराहा
सीडीओ शशांक चौधरी के इस प्रोजेक्ट को प्रदेश भर में सराहा जा रहा है। आधारशिला की सराहना प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र द्वारा भी की जा चुकी है। वहीं, अब अन्य जगहों पर भी आधारशिला खोलने की तैयारी की जा रही है। ब्लॉक स्तर पर भी लैब की शुरुआत की जाएगी।
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