टोक्यो ओलंपिक में भले ही मेरठ को पहले दिन मायूसी हाथ लगी हो लेकिन अभी पदक की उम्मीदें बरकरार हैं। मेरठ से पांच खिलाड़ी ओलंपिक में हिस्सा ले रहे हैं। इन्ही में से एक हैं हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया। मेरठ की वंदना कटारिया ने मात्र 12 साल की उम्र में घर छोड़कर हॉकी को अपना जीवन बना लिया। आज वह किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उनसे प्रेरणा लेकर एनएएस कॉलेज के मैदान में करीब 50 बेटियां हॉकी का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें से कई नेशनल स्तर तक पहुंच चुकी हैं। भारतीय महिला हॉकी टीम की बेहतरीन फॉरवर्ड ओलंपिक में कुछ कर गुजरने का सपना लेकर टोक्यो गई हैं।
एनएएस कॉलेज के कोच प्रदीप चिन्योटी 18 साल पहले उत्तराखंड गए थे। वहां रोशनाबाद की बेटी वंदना को उन्होंने हॉकी खेलते देखा तो उसे मेरठ ले आए। शुरुआती प्रशिक्षण के सालों में अपनी लगन और मेहनत से वंदना ने खुद को साबित किया।
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हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया के कोच प्रदीप चिन्योटी टीम के साथ
- फोटो : Amar Ujala Meerut
2006 में लखनऊ केडी सिंह बाबू स्टेडियम में प्रवेश लेकर हॉकी के नए आयामों को छूते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परचम लहराया। एनएएस का मैदान उनकी कामयाबी का गवाह है। कोच प्रदीप पिछले 19 सालों से एनएएस मैदान से पांच सौ से ज्यादा बेटियों को हॉकी सीखा चुके हैं। जिनमें काफी संख्या में बेटियां खेल कोटे से नौकरी पा चुकी हैं।
बीएवी में 25 पुरुष वर्ग, एसडी - 28 व विजन विद्यापीठ में 22 पुरुष खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। वंदना कटारिया ने मेरठ की महिला हॉकी को संजीवनी देते हुए युवा खिलाड़ियों में जोश भरा है। खिलाड़ियों ने कहा भारतीय महिला व पुरुष हॉकी टीम ओलंपिक में पदक जीतकर लौटेगी।
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टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम
- फोटो : Amar Ujala Meerut
मुझे वंदना पर गर्व : चिन्योटी
कोच प्रदीप चिन्योटी ने बताया कि वंदना को वह 2003 में मेरठ लेकर आए थे। 3 साल बाद लखनऊ केडी सिंह बाबू स्टेडियसम छोड़कर आए। वंदना देखने में एकदम शांत स्वभाव की हैं। मैदान पर एकदम तेजतर्रार खिलाड़ी हैं। यही कारण है कि वो बेस्ट फॉरवर्ड खिलाड़ियों में शामिल हो चुकी हैं। मेरठ की शिवानी, ममता यादव, सोनम भारद्वाज वंदना कटारिया के खेल से प्रेरित होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंची हैं। उन्होंने बताया कि कोच होने के नाते मुझे वंदना पर गर्व है।
वंदना की उपलब्धियां
-2013 में जूनियर वर्ल्डकप में कांस्य पदक
-2014 में एशियन गेम्स में कांस्य पदक
-2017 में एशियन कप में स्वर्ण पदक
-2018 में एशियन गेम्स में रजत पदक
-2016 में रियो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं
महिला हॉकी को जिंदा रखने में निभाई भूमिका
महिला हॉकी को जिंदा रखने में वंदना ने अहम रोल अदा किया है। एनएएस का मैदान महिला हॉकी को संजीवनी दे रहा है। अपने पुरुष वर्ग में युवाओं को हॉकी के प्रति जागरूक कर रहे हैं। - अहसानुल हक, बीएवी कॉलेज के हॉकी कोच
महिला हॉकी ने बनाई अलग पहचान
वंदना ने हमें अंतरराष्ट्रीय स्तरीय खेलों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया है। आज नई युवा महिला पीढ़ी हॉकी में आ रही हैं, ये वंदना का ही असर है। -ममता यादव, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
वंदना दीदी को खेलते देख हमें भी प्रेरणा मिलती है
भारतीय महिला हॉकी टीम में अहम जगह बनाने वाली वंदना दीदी को टीवी पर देखकर अच्छा लगता है। उनसे एनएएस मैदान पर अभ्यास करने वाली लड़कियों को प्रेरणा मिलती है। -शिवानी सिंह, हॉकी खिलाड़ी
टोक्यो ओलंपिक में हमारी टीम लाएगी पदक
टोक्यो ओलंपिक में हमारी महिला टीम पदक जरूर लाएगी। वंदना दीदी का अहम रोल रहेगा। एनएएस के मैदान पर हम जश्न मनाने को तैयार हैं। - मानसी, छीपी टैंक निवासी
हमें भी हॉकी में आगे बढ़ने का मिला जज्बा
जिले में एमपी सिंह व रोमियो जेम्स जैसे दिग्गज हॉकी खिलाड़ी रहे हैं, इनके वर्तमान में वंदना कटारिया ने हॉकी को ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। हमें भी हॉकी खेल में आगे बढ़ने का जज्बा मिला है। -मो. तारीक, हॉकी खिलाड़ी