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इंतजार की घड़ी: अगले राउंड में जरूर जीतेगा म्हारा हीरो, पढ़िए सौरभ चौधरी की हार पर क्या बोले, माता-पिता और भाई

Sun, 25 Jul 2021 08:30 AM IST
कपिल kapil मदन बालियान, अमर उजाला, मेरठ
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सौरभ चौधरी और उनके माता-पिता। - फोटो : amar ujala
शूटर सौरभ चौधरी का गांव मेरठ जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर है। कभी गांव की पहचान गन्ने के साथ आलू की खेती से होती थी, लेकिन अब दुनिया में यहां का सितारा अर्जुन अवार्डी सौरभ चौधरी चमक रहा है। 10 मीटर एयर पिस्टल की व्यक्तिगत स्पर्धा में शूटर को हार जरूर मिली, लेकिन उम्मीदें बरकरार है। ग्रामीण कहते हैं कि यह हार हमारे खिलाड़ी को हौसला और नई सीख देगी। क्वालिफाई राउंड में सौरभ ने दुनिया को दिखाया कि क्यों लोग उसकी पिस्टल के मुरीद हैं।

किसान जगमोहन सिंह के घर दिनभर लोगों की आवाजाही रही। वजह थी टोक्यो की रेंज में उनका छोटा बेटा खड़ा था। सौरभ के पिछले प्रदर्शन को देखें तो फाइनल के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, लेकिन हार से यहां कोई नाउम्मीद नजर नहीं आया।

ग्रामीण सुनील कुमार का कहना है कि सौरभ वापसी करेगा, वह दिलेर खिलाड़ी है। यह मान लीजिए कि बस वक्त खराब था। देश को वह ओलंपिक पदक जरूर दिलाएगा, उसके पास अभी लंबी उम्र का खजाना है। 
युवा नितिन सिवाच का कहना है कि फाइनल में हार मिली तो क्या हुआ, सौरभ ने क्वालिफाई राउंड में दुनिया के सबसे बड़े आठ निशानेबाजों को दिखाया कि वह क्यों पिस्टल का किंग है। सबसे कम उम्र के बावजूद वह पहले नंबर पर था।
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सौरभ चौधरी के गांव में लगा बैनर। - फोटो : amar ujala
दीपक कहते हैं कि अभी तो खेल बाकी है, पदक जरूर आएगा। सौरभ के पास लंबा कॅरियर है। सबसे बड़ी बात यह है कि वह कड़ी मेहनत करता है। यह कह सकते हैं कि बस शनिवार को फाइनल में उसका दिन नहीं था।

सर्वेश चौधरी कहते हैं कि सौरभ बेहद सकारात्मक है। वह पीछे हटने वाला खिलाड़ी नहीं है। हार भले ही मिली हो, लेकिन वह दुनिया का ध्यान एक बार फिर अपनी ओर खींचने में कामयाब रहा है।
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सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
‘पहली बार लगा मुझे सौरभ के साथ होना चाहिए था’
कोच अमित श्योराण कहते हैं कि यह बेहद तकलीफदेह है। पहली बार लगा कि मुझे सौरभ के पीछे खड़ा होना चाहिए था। खिलाड़ियों के साथ उनके निजी कोच जरूर भेजे जाने चाहिए। क्वालिफाई राउंड और फाइनल के बीच करीब 45 मिनट का वह समय था, जब किसी भी खिलाड़ी को कोच की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। सौरभ निश्चित तौर पर वापसी करेगा, अभी उसके पास मौका है। वह कोई कमी बाकी नहीं रखेगा। पदक नहीं जीत पाने का मलाल है, लेकिन सौरभ बड़ा खिलाड़ी है और वह देश की निशानेबाजी का भविष्य है।

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घर पर पूजा करते सौरभ चौधरी के माता-पिता। - फोटो : amar ujala
ओलंपिक पदक जरूर दिलाएगा सौरभ : नितिन
सौरभ चौधरी को ओलंपिक तक पहुंचाने वाले उसके बड़े भाई नितिन चौधरी कहते हैं कि पदक जरूर आएगा, बस इंतजार बढ़ गया है। सौरभ धुन का पक्का है और लक्ष्य हासिल किए बिना चैन से नहीं बैठता। टोक्यो में अभी भी मौका बरकरार है। अभी सौरभ सिर्फ 19 साल का है, उसके पास अवसरों की कमी नहीं है। वह अपने हर शॉट से सीखकर आगे बढ़ने वाला खिलाड़ी है।

हार के बाद ही बनता है असली खिलाड़ी
सौरभ के दादा सुखपाल सिंह कहते हैं कि हार जीत तो खेल का हिस्सा है। हार के बाद ही खिलाड़ी का हुनर निखरकर सामने आता है। सौरभ तो सबका लाडला और मेहनती बच्चा है, वह फिर सबको अपना दम दिखाएगा।
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सौरभ चौधरी और मनु भाकर
सौरभ ने ताकत झोंकी, भाग्य साथ नहीं था : जगमोहन
निशानेबाज के पिता जगमोहन कहते हैं कि सौरभ ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन बस भाग्य उसके साथ नहीं था। क्वालिफाई राउंड में सौरभ अपने पूरे रंग में नजर आया, जब फाइनल खेलने उतरा तो भाग्य उसके साथ नहीं था। वह वापसी करेगा। ओलंपिक में पहुंचकर गांव का नाम रोशन किया है। हमारे देश के लिए बहुत बड़ी बात है। वह फिर पदक जीतकर दिखाएगा। 
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शूटर सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
मां ने कहा कि बस खेल के बारे में सोचता है सौरभ
व्यक्तिगत स्पर्धा से बाहर होने के बाद सौरभ चौधरी की मां बृजेश देवी ने बताया कि खिलाड़ी के साथ हार-जीत तो लगी ही रहती है। वह अपने खेल को लेकर बहुत चिंतित रहता है। हर समय बस खेल के बारे में सोचता है। किसी भी प्रतिस्पर्धा में दो-तीन बच्चे ही जीत पाते हैं, बाकी को बाहर होना पड़ता है। हमें सौरभ पर गर्व है। 

कभी नहीं थमे सौरभ के कदम
सौरभ के भाई नितिन चौधरी का कहना है कि बिनौली की वीर शाहमल एकेडमी में प्रतिदिन जाना, कभी आलस या छुट्टी नहीं की। अभी तक सौरभ ने अंतरराष्ट्रीय स्तरीय स्पर्धाओं में 14 मेडल हासिल किए हैं।
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