शूटर सौरभ चौधरी का गांव मेरठ जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर है। कभी गांव की पहचान गन्ने के साथ आलू की खेती से होती थी, लेकिन अब दुनिया में यहां का सितारा अर्जुन अवार्डी सौरभ चौधरी चमक रहा है। 10 मीटर एयर पिस्टल की व्यक्तिगत स्पर्धा में शूटर को हार जरूर मिली, लेकिन उम्मीदें बरकरार है। ग्रामीण कहते हैं कि यह हार हमारे खिलाड़ी को हौसला और नई सीख देगी। क्वालिफाई राउंड में सौरभ ने दुनिया को दिखाया कि क्यों लोग उसकी पिस्टल के मुरीद हैं।
किसान जगमोहन सिंह के घर दिनभर लोगों की आवाजाही रही। वजह थी टोक्यो की रेंज में उनका छोटा बेटा खड़ा था। सौरभ के पिछले प्रदर्शन को देखें तो फाइनल के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, लेकिन हार से यहां कोई नाउम्मीद नजर नहीं आया।
ग्रामीण सुनील कुमार का कहना है कि सौरभ वापसी करेगा, वह दिलेर खिलाड़ी है। यह मान लीजिए कि बस वक्त खराब था। देश को वह ओलंपिक पदक जरूर दिलाएगा, उसके पास अभी लंबी उम्र का खजाना है।
युवा नितिन सिवाच का कहना है कि फाइनल में हार मिली तो क्या हुआ, सौरभ ने क्वालिफाई राउंड में दुनिया के सबसे बड़े आठ निशानेबाजों को दिखाया कि वह क्यों पिस्टल का किंग है। सबसे कम उम्र के बावजूद वह पहले नंबर पर था।